
गुरुद्वारा श्री बिभोर साहिब
गुरुद्वारा श्री बिभोर साहिब पंजाब के नया नंगल में स्थित पवित्र सिख स्थल है, जहां गुरु गोबिंद सिंह जी कई महीनों तक ठहरे और सतलुज तट पर चौपाई साहिब का पाठ किया।

गुरुद्वारा श्री बिभोर साहिब पंजाब के नया नंगल में स्थित पवित्र सिख स्थल है, जहां गुरु गोबिंद सिंह जी कई महीनों तक ठहरे और सतलुज तट पर चौपाई साहिब का पाठ किया।

गुरुद्वारा श्री पातशाही नौवीं साहिब, गांव भूपाल, गुरु तेग बहादुर जी की पावन चरण छोह से जुड़ा ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। यह स्थान मानसा जिले में स्थित है, जहां गुरु जी ने मालवा यात्रा के दौरान विश्राम किया था। यहां हर वर्ष गुरपुरब और जोर मेला श्रद्धा से मनाया जाता है।

गुरुद्वारा घाट साहिब – नंगल, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़ा पवित्र ऐतिहासिक स्थल है। यह वही स्थान है जहां गुरु जी ने सैदा मल्लाह की नाव में बैठकर सतलुज नदी पार की थी। गुरुद्वारा आज भी श्रद्धा, सेवा और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है।

गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब पातशाही नौवीं, खिवा कलां वह पावन स्थान है जहां गुरु तेग बहादुर जी ने अपने चरण रखे थे। यह गुरुद्वारा संगा जी की श्रद्धा, गुरु जी की कृपा और गांव में चली आ रही अनोखी परंपरा की याद में प्रसिद्ध है।

गुरुद्वारा साहिब पातशाही नौवीं, भीखी उस पावन स्थान की याद में स्थापित है जहाँ गुरु तेग बहादुर जी ने मालवा क्षेत्र की यात्रा के दौरान कुछ समय विश्राम किया था। यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु जी की शिक्षाओं, देसू की श्रद्धा और सिख इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा हुआ है।

गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब, रैलों, गुरु तेग बहादुर जी की पावन यात्रा और उनके आशीर्वाद से जुड़े चमत्कारी सरोवर के लिए प्रसिद्ध ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। यहां हर वर्ष बड़ी श्रद्धा से गुरुपर्व और शहीदी दिवस मनाए जाते हैं।

गुरुद्वारा गुरु तेग बहादुर साहिब, गुरने कलां वह पावन स्थान है जहां गुरु तेग बहादुर जी ने अपनी यात्रा के दौरान तीन दिन निवास किया। यह गुरुद्वारा गुरु जी की नम्रता, क्षमा और आध्यात्मिक शिक्षाओं की याद में श्रद्धा का केंद्र माना जाता है।

गुरुद्वारा साहिब पातशाही नौवीं, समाऊं पंजाब के मानसा जिले में स्थित एक पवित्र ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। यह स्थान श्री गुरु तेग बहादुर जी की पावन चरण छोह से जुड़ा हुआ है। यहां गुरु जी ने भक्त जीवना की सच्ची सेवा और श्रद्धा से प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद दिया था। आज यह गुरुद्वारा सिख इतिहास, सेवा भावना और गुरु कृपा का प्रतीक माना जाता है, जहां बड़ी श्रद्धा से गुरपुरब, कीर्तन और लंगर आयोजित किए जाते हैं।

गुरुद्वारा गुरुसर साहिब, मानपुर खंड, गुरु तेग बहादुर जी के आगमन से जुड़ा एक पवित्र स्थल है। यहां हर वर्ष शहीदी गुरपुरब श्रद्धा से मनाया जाता है और यह स्थान संगत के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।
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