
गुरुद्वारा कवि दरबार स्थान
गुरुद्वारा कवि दरबार स्थान गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल है जहाँ कवियों को सम्मान और आशीर्वाद मिलता था।

गुरुद्वारा कवि दरबार स्थान गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल है जहाँ कवियों को सम्मान और आशीर्वाद मिलता था।

गुरुद्वारा शेरगाह साहिब गुरुद्वारा शेरगाह साहिब साहस और वीरता का प्रतीक है। यह दसवें सिख

गुरुद्वारा राजघाट पातशाही दसवीं, कुरुक्षेत्र में गुरु गोबिंद सिंह जी के 1702–03 के सूर्य ग्रहण मेले के आगमन की स्मृति में बना है। गुरु जी ने अंधविश्वास को चुनौती दी और सत्य, तर्क व आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया। आज यह गुरुद्वारा श्रद्धालुओं के लिए ज्ञान और भक्ति का केंद्र है।

गुरुद्वारा भंगानी साहिब, जिला नाहन, हिमाचल प्रदेश में स्थित एक ऐतिहासिक सिख तीर्थ है। यह स्थल 1688 ईस्वी में हुए प्रसिद्ध भंगानी युद्ध से जुड़ा है, जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने साहस, रणनीति और आस्था के बल पर विजय प्राप्त की। यह गुरुद्वारा गुरु जी के वीर योद्धाओं, खालसा की एकता और धर्म की रक्षा के लिए दिए गए बलिदान की स्मृति का प्रतीक है। श्रद्धालु यहाँ आकर गुरु गोबिंद सिंह जी की वीर गाथा और आध्यात्मिक विरासत को नमन करते हैं।

गुरुद्वारा श्री नगीना घाट श्री हज़ूर साहिब के दक्षिण में गोदावरी नदी के किनारे स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। यह वही स्थान है जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी ने एक नगीने के माध्यम से धनी व्यापारी को विनम्रता और आध्यात्मिक ज्ञान का अनमोल संदेश दिया। यहां की संगमरमर की पालकी और शांत वातावरण इसे एक पवित्र दर्शन स्थल बनाते हैं।

गुरुद्वारा छेवीं पातशाही साहिब, पीलीभीत एक ऐतिहासिक और पवित्र स्थल है जहाँ गुरु हरगोबिंद साहिब जी और गुरु गोबिंद सिंह जी के आगमन की स्मृति जुड़ी है। शांत वातावरण और आध्यात्मिक महिमा के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

गुरुद्वारा पातशाही दसवीं, जगाधरी वह ऐतिहासिक स्थल है जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी कपाल मोचन से कुरुक्षेत्र जाते समय ठहरे थे। आज यह स्थान आस्था, सेवा और आध्यात्मिक शांति का प्रमुख केंद्र है।

गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी, जिसे पूरबी टोला भी कहा जाता है, इटावा का ऐतिहासिक स्थल है जहाँ गुरु तेग बहादुर जी ने 1665-66 में दर्शन दिए थे। कोर्ट और कोतवाली के पास स्थित यह स्थान उदासी परंपरा द्वारा संचालित है और यहाँ देवनागरी रूप में स्थापित गुरु ग्रंथ साहिब तथा एक सुरक्षित हस्तलिखित प्रति आज भी श्रद्धा से संजोई गई है।

गुरुद्वारा श्री कूहनी साहिब, मणिमाजरा के भैंसा तीबा गाँव में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी ने अनुपूर्णा की भक्ति से प्रसन्न होकर 17 पहर ध्यान लगाया था। यह स्थान आज मंदिर और गुरुद्वारे के साथ धार्मिक एकता का सुंदर प्रतीक है।
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