
सेंट्रल सिख टेम्पल, सिंगापुर
सेंट्रल सिख टेम्पल सिंगापुर का पहला और सबसे पुराना सिख गुरुद्वारा है, जिसकी स्थापना 1912 में हुई। टाउनर रोड पर स्थित यह गुरुद्वारा शांत दीवान हॉल और निःशुल्क लंगर सेवा के लिए प्रसिद्ध है।

सेंट्रल सिख टेम्पल सिंगापुर का पहला और सबसे पुराना सिख गुरुद्वारा है, जिसकी स्थापना 1912 में हुई। टाउनर रोड पर स्थित यह गुरुद्वारा शांत दीवान हॉल और निःशुल्क लंगर सेवा के लिए प्रसिद्ध है।

गुरुद्वारा भंडारा साहिब नानकमत्ता में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है, जो गुरु नानक देव जी की तीसरी उदासी से जुड़ा है। यहाँ योगियों को बरगद के वृक्ष से भोजन प्राप्त होने की अद्भुत घटना प्रसिद्ध है।

गुरुद्वारा साहिब मिलवुड्स, एडमंटन, अल्बर्टा, कनाडा में स्थित एक प्रमुख सिख धार्मिक और सामुदायिक केंद्र है। 1980 के दशक में स्थापित यह गुरुद्वारा स्थानीय सिख संगत के लिए आध्यात्मिक गतिविधियों, कीर्तन, अरदास और लंगर सेवा का मुख्य स्थल है। यहाँ समानता, सेवा और एकता के सिख सिद्धांतों को जीवंत रूप में देखा जा सकता है।

गुरुद्वारा नानकपुरी साहिब, टांडा गुरु नानक देव जी की 1514 की उत्तराखंड उदासी से जुड़ा पावन स्थान है। यहां गुरु जी ने रोहिल्ला पठानों को बाल तस्करी जैसी कुरीति छोड़ने का संदेश दिया। कई चमत्कारी घटनाओं के माध्यम से उन्होंने सत्य और धर्म का मार्ग दिखाया। आज यहां गुरु नानक देव जी, गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व, गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस और होला मोहल्ला श्रद्धा से मनाए जाते हैं। गुरुद्वारा परिसर में 35 कमरों वाली सराय भी उपलब्ध है।

गुरु नानक देव जी से संबंधित गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब, काशीपुर एक पवित्र ऐतिहासिक स्थान है। मान्यता है कि गुरु जी की अरदास के बाद ढेला नदी का जल नगर से दूर चला गया, जिसके बाद यहां बाढ़ नहीं आई। यहां प्रमुख गुरपुरब श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।

गुरुद्वारा चरण पादुका पातशाही पहली ते नौवीं, निजामाबाद में स्थित एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। यह स्थान गुरु नानक देव जी की पूर्वी उदासी और गुरु तेग बहादुर जी के आगमन से जुड़ा हुआ है, जहाँ आज भी प्राचीन विरासत सुरक्षित है।

गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर (दुख निवारण साहिब), बरेली नौवें गुरु की स्मृति में समर्पित एक शांत और आध्यात्मिक स्थल है, जहां श्रद्धालु गुरु जी की शिक्षाओं को याद करते हैं।

गुरुद्वारा श्री कंघा साहिब पातशाही दसवीं, सुल्हर गांव में स्थित एक पवित्र ऐतिहासिक स्थल है, जहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी लखनौर से यात्रा करते हुए पधारे थे। यह स्थान गुरु जी के पावन आगमन और उनसे जुड़ी स्मृतियों के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

गुरुद्वारा सोहिआणा साहिब पातशाही नौवीं, जिला बरनाला के गांव सोहिआणा में स्थित है। यह पवित्र स्थान गुरु तेग बहादुर जी की मालवा यात्रा से जुड़ा हुआ है, जहां उनके घोड़े के रुकने को दिव्य संकेत माना गया और आज भी यहां से जुड़ी ऐतिहासिक निशानियां श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं।
इस वेबसाइट पर मौजूद तस्वीरें इंटरनेट से ली गई हैं। गुरुद्वारा इतिहास से जुड़ी किसी भी कॉपीराइट संबंधी चिंता या सुधार के लिए कृपया हमसे sikhplaces@gmail.com पर संपर्क करें।
सिख प्लेसेस ©2025. सर्वाधिकार सुरक्षित।