गुरुद्वारा करमसर राड़ा साहिब

गुरुद्वारा करमसर राड़ा साहिब, लुधियाना के निकट स्थित एक पवित्र स्थल है। गुरु हरगोबिंद जी के आगमन और संत ईश्वर सिंह जी व संत किशन सिंह जी की सेवा से यह स्थान आध्यात्मिक केंद्र बना। आज भी यह श्रद्धालुओं के लिए गहन आस्था और शांति का प्रतीक है।

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सिख टेम्पल मकिंदू - केन्या | Sikh Temple Makindu | ਸਿੱਖ ਟੈਂਪਲ ਮਕਿੰਦੂ – ਕੀਨੀਆ

सिख टेम्पल मकिंदू – केन्या

सिख टेम्पल मकिंदू केन्या के मकिंदू क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक और प्रसिद्ध गुरुद्वारा है। 1926 में निर्मित यह पवित्र स्थल 24 घंटे निःशुल्क लंगर सेवा और यात्रियों के लिए दो रात तक ठहरने की सुविधा प्रदान करता है। युगांडा रेलवे काल से जुड़ा इसका इतिहास इसे पूर्वी अफ्रीका के प्रमुख सिख तीर्थ स्थलों में स्थान दिलाता है।

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Gurudwara Reetha Sahib

गुरुद्वारा रीठा साहिब

गुरुद्वारा रीठा साहिब उत्तराखंड के चंपावत ज़िले में स्थित है। यह पवित्र स्थान गुरु नानक देव जी की चरण छोह से जुड़ा है और रीठे के मीठे फल वाले चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है।

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गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब

गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में स्थित एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। यह स्थल गुरु नानक देव जी और गुरु हरगोबिंद जी के आगमन से पवित्र माना जाता है और सिख श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थ स्थान है।

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Central Sikh Temple, Singapore | सेंट्रल सिख टेम्पल, सिंगापुर

सेंट्रल सिख टेम्पल, सिंगापुर

सेंट्रल सिख टेम्पल सिंगापुर का पहला और सबसे पुराना सिख गुरुद्वारा है, जिसकी स्थापना 1912 में हुई। टाउनर रोड पर स्थित यह गुरुद्वारा शांत दीवान हॉल और निःशुल्क लंगर सेवा के लिए प्रसिद्ध है।

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गुरुद्वारा भंडारा साहिब – नानकमत्ता

गुरुद्वारा भंडारा साहिब नानकमत्ता में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है, जो गुरु नानक देव जी की तीसरी उदासी से जुड़ा है। यहाँ योगियों को बरगद के वृक्ष से भोजन प्राप्त होने की अद्भुत घटना प्रसिद्ध है।

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Gurudwara Sahib, Millwoods | गुरुद्वारा साहिब, मिलवुड्स

गुरुद्वारा साहिब, मिलवुड्स

गुरुद्वारा साहिब मिलवुड्स, एडमंटन, अल्बर्टा, कनाडा में स्थित एक प्रमुख सिख धार्मिक और सामुदायिक केंद्र है। 1980 के दशक में स्थापित यह गुरुद्वारा स्थानीय सिख संगत के लिए आध्यात्मिक गतिविधियों, कीर्तन, अरदास और लंगर सेवा का मुख्य स्थल है। यहाँ समानता, सेवा और एकता के सिख सिद्धांतों को जीवंत रूप में देखा जा सकता है।

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गुरुद्वारा नानकपुरी साहिब, टांडा

गुरुद्वारा नानकपुरी साहिब, टांडा गुरु नानक देव जी की 1514 की उत्तराखंड उदासी से जुड़ा पावन स्थान है। यहां गुरु जी ने रोहिल्ला पठानों को बाल तस्करी जैसी कुरीति छोड़ने का संदेश दिया। कई चमत्कारी घटनाओं के माध्यम से उन्होंने सत्य और धर्म का मार्ग दिखाया। आज यहां गुरु नानक देव जी, गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व, गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस और होला मोहल्ला श्रद्धा से मनाए जाते हैं। गुरुद्वारा परिसर में 35 कमरों वाली सराय भी उपलब्ध है।

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गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब, काशीपुर

गुरु नानक देव जी से संबंधित गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब, काशीपुर एक पवित्र ऐतिहासिक स्थान है। मान्यता है कि गुरु जी की अरदास के बाद ढेला नदी का जल नगर से दूर चला गया, जिसके बाद यहां बाढ़ नहीं आई। यहां प्रमुख गुरपुरब श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।

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