ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਤੇਗ ਬਹਾਦਰ - ਬਰੇਲੀ

गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर – बरेली

गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर (दुख निवारण साहिब), बरेली नौवें गुरु की स्मृति में समर्पित एक शांत और आध्यात्मिक स्थल है, जहां श्रद्धालु गुरु जी की शिक्षाओं को याद करते हैं।

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Gurudwara Sohiana Sahib

गुरुद्वारा सोहिआणा साहिब पातशाही नौवीं

गुरुद्वारा सोहिआणा साहिब पातशाही नौवीं, जिला बरनाला के गांव सोहिआणा में स्थित है। यह पवित्र स्थान गुरु तेग बहादुर जी की मालवा यात्रा से जुड़ा हुआ है, जहां उनके घोड़े के रुकने को दिव्य संकेत माना गया और आज भी यहां से जुड़ी ऐतिहासिक निशानियां श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं।

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Gurudwara Gobind Ghat | गुरुद्वारा श्री गोबिंद घाट | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਸ੍ਰੀ ਗੋਬਿੰਦ ਘਾਟ

गुरुद्वारा श्री गोबिंद घाट

गुरुद्वारा श्री गोबिंद घाट अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है और हेमकुंड साहिब की पवित्र यात्रा का मुख्य प्रारंभिक स्थल माना जाता है। श्रद्धालु आगे की यात्रा से पहले यहाँ विश्राम करते हैं और फिर पैदल या खच्चरों के माध्यम से यात्रा जारी रखते हैं।

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गुरुद्वारा गोबिंद धाम | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਗੋਬਿੰਦ ਧਾਮ

गुरुद्वारा गोबिंद धाम

गुरुद्वारा श्री गोबिंद धाम जी, भामियां कलां लुधियाना में स्थित एक शांत स्थान है जहाँ श्रद्धालु अरदास, कीर्तन और सेवा के माध्यम से आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।

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Gurudwara Teer Garhi Sahib | गुरुद्वारा तीर गढ़ी साहिब | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਤੀਰ ਗੜ੍ਹੀ ਸਾਹਿਬ

गुरुद्वारा तीर गढ़ी साहिब

गुरुद्वारा तीर गढ़ी साहिब, भंगानी में स्थित वह ऐतिहासिक स्थान है जहाँ सन् 1688 में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने पहाड़ी राजाओं के विरुद्ध अपना पहला युद्ध लड़ा। यह स्थल सिख इतिहास में साहस, धर्म और न्याय की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

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Gurudwara Sehra Sahib

गुरुद्वारा सेहरा साहिब, बस्सी

गुरुद्वारा सेहरा साहिब हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित एक पवित्र स्थान है, जहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने विवाह से पूर्व विश्राम किया और परंपरा अनुसार सेहरा धारण किया था।

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Gurudwara Sri Dastar Asthan Sahib | गुरुद्वारा श्री दस्तार अस्थान साहिब | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਸ੍ਰੀ ਦਸਤਾਰ ਅਸਥਾਨ ਸਾਹਿਬ

गुरुद्वारा श्री दस्तार अस्थान साहिब

गुरुद्वारा श्री दस्तार अस्थान साहिब एक पवित्र स्थल है जहाँ कलगीधर पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज प्रकृति के बीच बैठकर अपनी दस्तार बाँधते थे। भंगाणी साहिब के युद्ध के बाद यहीं पीर बुधु शाह जी को गुरु जी द्वारा दस्तार और कंघा सिरोपा रूप में प्रदान किया गया, जो इस स्थान के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्त्व को दर्शाता है।

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