
गुरुद्वारा नानक शाही
गुरुद्वारा नानक शाही, ढाका (बांग्लादेश) में स्थित एक प्रमुख सिख धार्मिक स्थल है। यह स्थान गुरु नानक देव जी की ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति में बना है और बांग्लादेश के सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है।

गुरुद्वारा नानक शाही, ढाका (बांग्लादेश) में स्थित एक प्रमुख सिख धार्मिक स्थल है। यह स्थान गुरु नानक देव जी की ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति में बना है और बांग्लादेश के सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है।

गुरुद्वारा पाहिन साहिब सच्ची मंजी पंजाब के फिरोजपुर जिले के गांव दुलची के में स्थित एक पवित्र स्थान है। यह स्थल गुरु अमर दास जी की चरण छोह और बाबा सच-ना-सच से जुड़ी ऐतिहासिक कथा के कारण विशेष महत्व रखता है।

गुरुद्वारा बीबी कौलां जी श्री कौलसर साहिब गुरुद्वारा बीबी कौलां जी श्री कौलसर साहिब पंजाब

गुरुद्वारा करमसर राड़ा साहिब, लुधियाना के निकट स्थित एक पवित्र स्थल है। गुरु हरगोबिंद जी के आगमन और संत ईश्वर सिंह जी व संत किशन सिंह जी की सेवा से यह स्थान आध्यात्मिक केंद्र बना। आज भी यह श्रद्धालुओं के लिए गहन आस्था और शांति का प्रतीक है।

गुरुद्वारा अड़ीसर साहिब बरनाला–बठिंडा मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक गुरुधाम है। यह पवित्र स्थान गुरु तेग बहादुर जी की चरण छोह से जुड़ा है और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र माना जाता है। यहां सच्चे मन से की गई अरदास को अटके कार्यों की पूर्ति करने वाला माना जाता है।

गुरुद्वारा नौलखा साहिब, फतेहगढ़ साहिब ज़िले के गांव नौलखा में स्थित एक पवित्र स्थल है। इसका संबंध गुरु तेग बहादुर जी और लख़ी शाह वंजारा की ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है, जहाँ नौ टके को नौ लाख के समान आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

गुरुद्वारा टाहली साहिब (संतोखसर) अमृतसर में स्थित एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा है, जो गुरु अर्जन देव जी से संबंधित है। संतोखसर सरोवर को अमृतसर का पहला खुदवाया गया सरोवर माना जाता है, जिसकी शुरुआत गुरु अमर दास जी के आदेश से हुई और बाद में गुरु अर्जन देव जी द्वारा पूर्ण कराया गया।

गुरुद्वारा भाई मंझ जी पंजाब के जिला होशियारपुर के गाँव कंगमाई में स्थित है। यह पवित्र स्थल भाई मंझ जी की निस्वार्थ सेवा और गुरु अर्जन देव जी के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा की स्मृति में समर्पित है, जो सिख इतिहास में सेवा और विश्वास का प्रेरणास्रोत माना जाता है।

गुरुद्वारा रीठा साहिब उत्तराखंड के चंपावत ज़िले में स्थित है। यह पवित्र स्थान गुरु नानक देव जी की चरण छोह से जुड़ा है और रीठे के मीठे फल वाले चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है।
इस वेबसाइट पर मौजूद तस्वीरें इंटरनेट से ली गई हैं। गुरुद्वारा इतिहास से जुड़ी किसी भी कॉपीराइट संबंधी चिंता या सुधार के लिए कृपया हमसे sikhplaces@gmail.com पर संपर्क करें।
सिख प्लेसेस ©2025. सर्वाधिकार सुरक्षित।