
गुरुद्वारा चौवा साहिब
गुरुद्वारा चौवा साहिब रोहतास किले के पास झेलम में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। मान्यता है कि यहाँ गुरु नानक देव जी ने अपनी उदासी के दौरान धरती से जल का स्रोत प्रकट किया था।

गुरुद्वारा चौवा साहिब रोहतास किले के पास झेलम में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। मान्यता है कि यहाँ गुरु नानक देव जी ने अपनी उदासी के दौरान धरती से जल का स्रोत प्रकट किया था।

गुरुद्वारा श्री गुरु नानक साहिब मखदूम पुर, पाकिस्तान के खानेवाल जिले में स्थित एक ऐतिहासिक स्थान है। यहाँ गुरु नानक देव जी ने सज्जन ठग को उपदेश देकर उसके जीवन को बदल दिया, जिसके बाद उसकी सराय को गुरुद्वारे में परिवर्तित कर दिया गया।

गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर, कानपुर में स्थित पवित्र स्थल है जहाँ गुरु तेग बहादुर जी 1665–66 में अपनी यात्रा के दौरान ठहरे थे। यह स्थान आज सिख श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है।

गुरुद्वारा पंजा साहिब पाकिस्तान के हसन अब्दाल शहर में स्थित सिखों का एक प्रसिद्ध और पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान गुरु नानक देव जी से जुड़ा हुआ है और यहाँ एक पत्थर पर उनके हाथ की छाप मानी जाती है। यह गुरुद्वारा उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है जब गुरु जी ने चमत्कार के रूप में पानी का चश्मा प्रकट किया और फेंके गए पत्थर को अपने हाथ से रोक लिया। आज यह स्थल दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान है।

गुरुद्वारा रोड़ी साहिब, एमिनाबाद (पाकिस्तान) में स्थित एक ऐतिहासिक सिख तीर्थ स्थल है। यह वही स्थान है जहाँ 1521 में बाबर के पंजाब पर आक्रमण के समय गुरु नानक देव जी कंकड़ों पर बैठकर प्रभु का सिमरन कर रहे थे और बाद में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। यह गुरुद्वारा उस घटना की स्मृति में बनाया गया था और आज भी सिख इतिहास की एक महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है।

गुरुद्वारा बुर्ज माता गुजरी जी, जिसे ठंडा बुर्ज भी कहा जाता है, सिरहिंद में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। यहीं माता गुजरी जी और गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों को कैद रखा गया था। यह स्थान सिख इतिहास में महान शहादत और बलिदान की याद दिलाता है।

गुरुद्वारा शहीद गंज सिंह सिंघनिया लाहौर के नौलखा बाज़ार में स्थित है। यह स्थान 18वीं शताब्दी में शहीद हुए हजारों सिख पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की शहादत की स्मृति में बना है। यह गुरुद्वारा गुरुद्वारा भाई तरु सिंह के सामने स्थित है और सिख इतिहास में साहस और अटूट आस्था का प्रतीक माना जाता है।

गुरुद्वारा नानक शाही, ढाका (बांग्लादेश) में स्थित एक प्रमुख सिख धार्मिक स्थल है। यह स्थान गुरु नानक देव जी की ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति में बना है और बांग्लादेश के सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है।

गुरुद्वारा पाहिन साहिब सच्ची मंजी पंजाब के फिरोजपुर जिले के गांव दुलची के में स्थित एक पवित्र स्थान है। यह स्थल गुरु अमर दास जी की चरण छोह और बाबा सच-ना-सच से जुड़ी ऐतिहासिक कथा के कारण विशेष महत्व रखता है।
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