गुरुद्वारा खालसा सभा, माटुंगा

गुरुद्वारा खालसा सभा, माटुंगा (मुंबई) एक प्रसिद्ध सिख गुरुद्वारा है जो गुरु नानक मार्ग पर सिटी लाइट सिनेमा के पीछे स्थित है और संगत को आध्यात्मिक वातावरण व आवास सुविधा प्रदान करता है।

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गुरुद्वारा बाबा गुरदित्ता जी

गुरुद्वारा बाबा गुरदित्ता जी पंजाब के नवांशहर जिले के चांदपुर रुड़की गांव में स्थित एक पवित्र स्थान है, जो बाबा गुरदित्ता जी और बाबा केसरा सिंह जी की स्मृति में समर्पित है। यहाँ हर वर्ष निशान साहिब समारोह और बाबा गुरदित्ता जी का जन्मदिवस श्रद्धा से मनाया जाता है।

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गुरुद्वारा गुप्तसर साहिब

गुरुद्वारा गुप्तसर साहिब, छत्तियाना गांव (श्री मुक्तसर साहिब) में स्थित एक पवित्र स्थल है, जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी के आगमन और पीर सैय्यद इब्राहिम के सिख धर्म स्वीकार करने की ऐतिहासिक घटना से यह स्थान प्रसिद्ध है।

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गुरुद्वारा माता सुंदर कौर

गुरुद्वारा माता सुंदर कौर, सेक्टर 70 मोहाली में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। यह स्थान उस पावन घटना को स्मरण करता है जब गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहाँ संगत के साथ दीवान लगाया और माता साहिब कौर जी तथा माता सुंदर कौर जी का गुरु जी से पुनर्मिलन हुआ।

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गुरुद्वारा साहिब बीबी शरण कौर जी

गुरुद्वारा साहिब बीबी शरण कौर जी, जिला रूपनगर के रायपुर गाँव में स्थित है। यह स्थान 1705 में शहीद हुईं बीबी शरण कौर जी की महान वीरता और बलिदान की याद में प्रसिद्ध है, जिन्होंने चमकौर की लड़ाई के बाद साहिबज़ादों और अन्य सिख शहीदों का अंतिम संस्कार किया और अपनी इज्जत व धर्म की रक्षा करते हुए शहीदी प्राप्त की।

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Gurudwara Sahib Buddha Johad | गुरुद्वारा साहिब बुढ्ढा जोहड़ | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਬੁੱਢਾ ਜੋਹੜ

गुरुद्वारा बुढ्ढा जोहड़

शहीद नगर गुरुद्वारा साहिब बुढ़ा जोहड़, श्रीगंगानगर के पास स्थित एक ऐतिहासिक सिख स्थल है। यहाँ 1740 में भाई सुखा सिंह और भाई महिताब सिंह द्वारा मस्सा रंगड़ के वध के बाद उसका सिर संगत के सामने प्रस्तुत किया गया था। यह गुरुद्वारा सिख वीरता, धर्म की रक्षा और बलिदान की प्रेरणादायक याद को संजोए हुए है।

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गुरु राम राय दरबार साहिब

गुरु राम राय दरबार साहिब देहरादून, उत्तराखंड में स्थित एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है। यह बाबा राम राय, गुरु हर राय जी के ज्येष्ठ पुत्र, को समर्पित है। 17वीं शताब्दी में स्थापित यह स्थल अपनी अनोखी वास्तुकला और इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की इमारत में इस्लामी और मुगल शैली के तत्व दिखाई देते हैं, जो इसे अन्य गुरुद्वारों से अलग बनाते हैं।

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गुरुद्वारा नानकलामा साहिब

गुरुद्वारा नानकलामा साहिब सिक्किम के चुंगथांग में स्थित एक पवित्र स्थल है, जिसकी स्थापना 1969 में असम राइफल्स की सहायता से की गई थी। यह गुरुद्वारा गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं की स्मृति में बनाया गया और आज स्थानीय लोगों तथा सैन्य कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र है।

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