
गुरुद्वारा गुरुबाग साहिब – वाराणसी
गुरुद्वारा गुरुबाग साहिब वाराणसी में स्थित पवित्र स्थान है, जहां गुरु नानक देव जी ने सत्य, विनम्रता और नाम सिमरन का उपदेश दिया और अनेक लोगों को आध्यात्मिक मार्ग दिखाया।

गुरुद्वारा गुरुबाग साहिब वाराणसी में स्थित पवित्र स्थान है, जहां गुरु नानक देव जी ने सत्य, विनम्रता और नाम सिमरन का उपदेश दिया और अनेक लोगों को आध्यात्मिक मार्ग दिखाया।

गुरुद्वारा साहिब छेवीं पातशाही, नवाबगंज एक पवित्र सिख स्थल है, जहां गुरु हरगोबिंद साहिब जी के आगमन की स्मृति जुड़ी है। यह स्थान संगत, कीर्तन और लंगर की परंपरा के साथ श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक शांति का केंद्र बना हुआ है।

गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर (दुख निवारण साहिब), बरेली नौवें गुरु की स्मृति में समर्पित एक शांत और आध्यात्मिक स्थल है, जहां श्रद्धालु गुरु जी की शिक्षाओं को याद करते हैं।

गुरुद्वारा श्री कंघा साहिब पातशाही दसवीं, सुल्हर गांव में स्थित एक पवित्र ऐतिहासिक स्थल है, जहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी लखनौर से यात्रा करते हुए पधारे थे। यह स्थान गुरु जी के पावन आगमन और उनसे जुड़ी स्मृतियों के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

गुरुद्वारा सोहिआणा साहिब पातशाही नौवीं, जिला बरनाला के गांव सोहिआणा में स्थित है। यह पवित्र स्थान गुरु तेग बहादुर जी की मालवा यात्रा से जुड़ा हुआ है, जहां उनके घोड़े के रुकने को दिव्य संकेत माना गया और आज भी यहां से जुड़ी ऐतिहासिक निशानियां श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं।

गुरुद्वारा श्री गोबिंद घाट अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है और हेमकुंड साहिब की पवित्र यात्रा का मुख्य प्रारंभिक स्थल माना जाता है। श्रद्धालु आगे की यात्रा से पहले यहाँ विश्राम करते हैं और फिर पैदल या खच्चरों के माध्यम से यात्रा जारी रखते हैं।

गुरुद्वारा श्री गोबिंद धाम जी, भामियां कलां लुधियाना में स्थित एक शांत स्थान है जहाँ श्रद्धालु अरदास, कीर्तन और सेवा के माध्यम से आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।

गुरुद्वारा तीर गढ़ी साहिब, भंगानी में स्थित वह ऐतिहासिक स्थान है जहाँ सन् 1688 में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने पहाड़ी राजाओं के विरुद्ध अपना पहला युद्ध लड़ा। यह स्थल सिख इतिहास में साहस, धर्म और न्याय की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

गुरुद्वारा सेहरा साहिब हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित एक पवित्र स्थान है, जहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने विवाह से पूर्व विश्राम किया और परंपरा अनुसार सेहरा धारण किया था।
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