गुरुद्वारा दमदमा साहिब

गुरुद्वारा दमदमा साहिब दिल्ली में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है, जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी की मुलाकात बहादुर शाह से हुई थी। यह स्थान सिख इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा हुआ है।

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गुरुद्वारा माता सुंदरी जी

गुरुद्वारा माता सुंदरी जी दिल्ली में स्थित एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा है, जहाँ माता सुंदरी जी ने गुरु गोबिंद सिंह जी के बाद सिख समुदाय का मार्गदर्शन किया। यह स्थान सिख इतिहास में उनकी महान सेवाओं और नेतृत्व की स्मृति को समर्पित है।

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Gurudwara Badi Sangat - Varanasi | गुरुद्वारा बड़ी संगत - वाराणसी | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਬੜੀ ਸੰਗਤ - ਵਾਰਾਣਸੀ

गुरुद्वारा बड़ी संगत – वाराणसी

गुरुद्वारा बड़ी संगत वाराणसी का एक ऐतिहासिक सिख तीर्थ है जहाँ गुरु तेग बहादुर साहिब जी 7 महीने 13 दिन ठहरे थे। यहाँ बावली गंगा परगट का पवित्र स्थान और गुरु जी से जुड़े कई ऐतिहासिक अवशेष सुरक्षित हैं।

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गुरुद्वारा खालसा सभा, माटुंगा

गुरुद्वारा खालसा सभा, माटुंगा (मुंबई) एक प्रसिद्ध सिख गुरुद्वारा है जो गुरु नानक मार्ग पर सिटी लाइट सिनेमा के पीछे स्थित है और संगत को आध्यात्मिक वातावरण व आवास सुविधा प्रदान करता है।

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गुरुद्वारा बाबा गुरदित्ता जी

गुरुद्वारा बाबा गुरदित्ता जी पंजाब के नवांशहर जिले के चांदपुर रुड़की गांव में स्थित एक पवित्र स्थान है, जो बाबा गुरदित्ता जी और बाबा केसरा सिंह जी की स्मृति में समर्पित है। यहाँ हर वर्ष निशान साहिब समारोह और बाबा गुरदित्ता जी का जन्मदिवस श्रद्धा से मनाया जाता है।

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गुरुद्वारा गुप्तसर साहिब

गुरुद्वारा गुप्तसर साहिब, छत्तियाना गांव (श्री मुक्तसर साहिब) में स्थित एक पवित्र स्थल है, जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी के आगमन और पीर सैय्यद इब्राहिम के सिख धर्म स्वीकार करने की ऐतिहासिक घटना से यह स्थान प्रसिद्ध है।

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गुरुद्वारा माता सुंदर कौर

गुरुद्वारा माता सुंदर कौर, सेक्टर 70 मोहाली में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। यह स्थान उस पावन घटना को स्मरण करता है जब गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहाँ संगत के साथ दीवान लगाया और माता साहिब कौर जी तथा माता सुंदर कौर जी का गुरु जी से पुनर्मिलन हुआ।

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गुरुद्वारा साहिब बीबी शरण कौर जी

गुरुद्वारा साहिब बीबी शरण कौर जी, जिला रूपनगर के रायपुर गाँव में स्थित है। यह स्थान 1705 में शहीद हुईं बीबी शरण कौर जी की महान वीरता और बलिदान की याद में प्रसिद्ध है, जिन्होंने चमकौर की लड़ाई के बाद साहिबज़ादों और अन्य सिख शहीदों का अंतिम संस्कार किया और अपनी इज्जत व धर्म की रक्षा करते हुए शहीदी प्राप्त की।

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