
गुरुद्वारा रीठा साहिब
गुरुद्वारा रीठा साहिब उत्तराखंड के चंपावत ज़िले में स्थित है। यह पवित्र स्थान गुरु नानक देव जी की चरण छोह से जुड़ा है और रीठे के मीठे फल वाले चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है।

गुरुद्वारा रीठा साहिब उत्तराखंड के चंपावत ज़िले में स्थित है। यह पवित्र स्थान गुरु नानक देव जी की चरण छोह से जुड़ा है और रीठे के मीठे फल वाले चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है।

गुरुद्वारा लखपत साहिब गुजरात के कच्छ ज़िले के ऐतिहासिक नगर लखपत में स्थित है। यह पवित्र स्थान गुरु नानक देव जी की उदासी यात्रा से जुड़ा है और यहाँ उनसे संबंधित कुछ पवित्र अवशेष सुरक्षित हैं। 2001 के भूकंप के बाद इसके संरक्षण कार्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।

गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में स्थित एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। यह स्थल गुरु नानक देव जी और गुरु हरगोबिंद जी के आगमन से पवित्र माना जाता है और सिख श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थ स्थान है।

गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर नौवीं पातशाही, छोटा मिर्ज़ापुर, गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोबिंद सिंह जी की पावन यात्रा की स्मृति में स्थापित एक ऐतिहासिक स्थल है। यह गुरुद्वारा वाराणसी–राबर्ट्सगंज मार्ग पर स्थित है और 1980 के दशक में निर्मित वर्तमान भवन श्रद्धालुओं के सहयोग से संचालित होता है।

गुरुद्वारा टोका साहिब हरियाणा–हिमाचल सीमा के पास स्थित पवित्र स्थल है, जो गुरु गोबिंद सिंह जी की नाहन यात्रा की स्मृति में स्थापित है। यहाँ गुरु जी ने अपने आगमन और वापसी के दौरान प्रवास किया था।

गुरुद्वारा भंडारा साहिब नानकमत्ता में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है, जो गुरु नानक देव जी की तीसरी उदासी से जुड़ा है। यहाँ योगियों को बरगद के वृक्ष से भोजन प्राप्त होने की अद्भुत घटना प्रसिद्ध है।

हरिद्वार स्थित गुरुद्वारा नानकवाड़ा साहिब वह पवित्र स्थान है जहाँ गुरु नानक देव जी ने गंगा तट पर अंधविश्वास और कर्मकांड के विरुद्ध अपना अद्भुत संदेश दिया। यह स्थल सिख इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और उनकी पहली उदासी से जुड़ा हुआ है।

गुरुद्वारा नानकपुरी साहिब, टांडा गुरु नानक देव जी की 1514 की उत्तराखंड उदासी से जुड़ा पावन स्थान है। यहां गुरु जी ने रोहिल्ला पठानों को बाल तस्करी जैसी कुरीति छोड़ने का संदेश दिया। कई चमत्कारी घटनाओं के माध्यम से उन्होंने सत्य और धर्म का मार्ग दिखाया। आज यहां गुरु नानक देव जी, गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व, गुरु अर्जन देव जी का शहीदी दिवस और होला मोहल्ला श्रद्धा से मनाए जाते हैं। गुरुद्वारा परिसर में 35 कमरों वाली सराय भी उपलब्ध है।

गुरु नानक देव जी से संबंधित गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब, काशीपुर एक पवित्र ऐतिहासिक स्थान है। मान्यता है कि गुरु जी की अरदास के बाद ढेला नदी का जल नगर से दूर चला गया, जिसके बाद यहां बाढ़ नहीं आई। यहां प्रमुख गुरपुरब श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।
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