गुरुद्वारा लखपत साहिब

गुरुद्वारा लखपत साहिब, जिसे गुरुद्वारा श्री नानक दरबार साहिब या गुरुद्वारा पहली पातशाही के नाम से भी जाना जाता है, भारत के गुजरात राज्य के कच्छ ज़िले के ऐतिहासिक कस्बे लखपत में स्थित एक श्रद्धेय सिख धार्मिक स्थल है। यह पवित्र स्थान सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी की यात्रा की स्मृति में स्थापित है। माना जाता है कि 1519 से 1521 के बीच अपनी चौथी उदासी (धर्म प्रचार यात्रा) के दौरान गुरु नानक देव जी यहाँ पधारे थे। कुछ परंपराएँ इस स्थान को उनकी दूसरी उदासी (1506–1513) से भी जोड़ती हैं। यह भी विश्वास किया जाता है कि मक्का की ओर जाते समय गुरु जी ने यहाँ विश्राम किया था, जिससे इस क्षेत्र पर गहरी आध्यात्मिक छाप पड़ी।

गुरुद्वारे में गुरु नानक देव जी से संबंधित कई पवित्र अवशेष सुरक्षित हैं। इनमें उनकी लकड़ी की खड़ाऊँ, एक पालकी (पंगूड़ा), प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ तथा दो प्रमुख उदासी नेताओं से जुड़े चिह्न शामिल हैं। प्रारंभ में इस स्थान की देखरेख उदासी संप्रदाय द्वारा की जाती थी, जो गुरु नानक देव जी का अत्यंत सम्मान करते थे। बाद में, गांधीधाम के गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सिंह सभा के सहयोग से स्थानीय सिख समुदाय ने इसकी जिम्मेदारी संभाली।

गुजरात राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा राज्य संरक्षित स्मारक (S-GJ-65) घोषित किया गया यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा 2001 के विनाशकारी भूकंप के बाद अपनी उत्कृष्ट पुनर्स्थापना और संरक्षण के लिए 2004 में UNESCO एशिया-पैसिफिक अवॉर्ड ऑफ डिस्टिंक्शन से सम्मानित किया गया, जिससे इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान प्राप्त हुई।

गुरुद्वारा लखपत साहिब तक पहुँचने के लिए आप नीचे दिए गए विकल्पों में से अपनी सुविधा अनुसार चयन कर सकते हैं:

कार द्वारा: लखपत कच्छ के प्रमुख कस्बों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। यह भुज से लगभग 135 किमी दूर स्थित है, जो जिले का मुख्यालय है। भुज से नखत्राणा मार्ग के माध्यम से लखपत के लिए नियमित बसें और निजी टैक्सियाँ उपलब्ध रहती हैं।

रेल द्वारा: निकटतम रेलवे स्टेशन भुज रेलवे स्टेशन है, जो अहमदाबाद, गांधीधाम और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। भुज से आप टैक्सी किराए पर लेकर या बस के माध्यम से लखपत पहुँच सकते हैं।

वायु मार्ग द्वारा: सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा भुज हवाई अड्डा (BHJ) है, जो लगभग 130 किमी की दूरी पर स्थित है। यहाँ मुंबई और गुजरात के अन्य बड़े शहरों से नियमित उड़ानें संचालित होती हैं। हवाई अड्डे से लखपत के लिए टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध हैं।

स्थानीय सुझाव: लखपत भारत–पाकिस्तान सीमा के निकट एक दूरस्थ क्षेत्र में स्थित है। इसलिए यात्रा से पहले उचित योजना बनाना और आवश्यक सामान साथ रखना उचित है। यात्री अक्सर अपने दौरे में नारायण सरोवर और कोटेश्वर मंदिर जैसे निकटवर्ती स्थलों को भी शामिल करते हैं।

यात्रा से पहले अपने प्रारंभिक स्थान और वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार मार्ग और परिवहन की जानकारी की पुष्टि अवश्य कर लें।

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