Gurudwara Guru Amardas, Dhunni, Pakistan | गुरुद्वारा गुरु अमरदास, धुन्नी | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਗੁਰੂ ਅਮਰਦਾਸ, ਧੁੰਨੀ

गुरुद्वारा गुरु अमरदास, धुन्नी

गुरुद्वारा गुरु अमरदास, धुन्नी सिखों के तीसरे गुरु की स्मृति से जुड़ा पवित्र स्थल है। यहाँ गुरु अमरदास जी का पवित्र जूता सुरक्षित रहा, जिसे रोग निवारण से भी जोड़ा जाता है।

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Gurudwara Tambu Sahib, Pakistan | गुरुद्वारा तंबू साहिब | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਤੰਬੂ ਸਾਹਿਬ

गुरुद्वारा तंबू साहिब

गुरुद्वारा तंबू साहिब गुरु नानक देव जी के जीवन की उस घटना से जुड़ा है जब उन्होंने अपने पिता द्वारा दिए गए धन से भूखे साधुओं को भोजन कराया। यह पवित्र स्थल गुरुद्वारा जन्म अस्थान से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित है और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।

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गुरुद्वारा पहली पातशाही, चावली मशाइख, बुरेवाला | Gurudwara Pehli Patshahi at Chawli Masaekh, Burewala | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਪਹਿਲੀ ਪਾਤਸ਼ਾਹੀ, ਚਾਵਲੀ ਮਸ਼ੇਖ, ਬੂਰੇਵਾਲਾ

गुरुद्वारा पहली पातशाही, चावली मशाइख, बुरेवाला

गुरुद्वारा पहली पातशाही, चावली मशाइख, बुरेवाला सिख इतिहास का एक पवित्र स्थल है। स्थानीय मान्यता के अनुसार गुरु नानक देव जी ने यहां तपस्या की थी, इसलिए इसे तपस्थान गुरु नानक भी कहा जाता है।

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ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਛੇਵੀਂ ਪਾਤਸ਼ਾਹੀ ਸਾਹਿਬ, ਕੋਟਲੀ ਭਾਗਾ

गुरुद्वारा छेवीं पातशाही साहिब, कोटली भागा

गुरुद्वारा छेवीं पातशाही साहिब, कोटली भागा, वह पावन स्थल है जहाँ गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने विश्राम किया था। यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा आज भी सिख श्रद्धालुओं के लिए गहरी आध्यात्मिक आस्था और विरासत का प्रतीक है।

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Gurudwara Panjvin and Chhevin Patshahi, Pakistan | गुरुद्वारा पांचवीं और छेवीं पातशाही, ननकाना साहिब | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਪੰਜਵੀਂ ਅਤੇ ਛੇਵੀਂ ਪਾਤਸ਼ਾਹੀ, ਨਨਕਾਣਾ ਸਾਹਿਬ

गुरुद्वारा पांचवीं और छेवीं पातशाही, ननकाना साहिब

ननकाना साहिब में गुरुद्वारा तंबू साहिब के पास स्थित गुरुद्वारा पांचवीं और छेवीं पातशाही गुरु अर्जन देव जी और गुरु हरगोबिंद साहिब जी की पावन स्मृतियों से जुड़ा है। यह ऐतिहासिक स्थल अपनी सादगी, आध्यात्मिक गरिमा और सिख इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय के कारण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

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Gurudwara Dehra Sahib Guru Arjan Dev Ji, Pakistan | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਡੇਹਰਾ ਸਾਹਿਬ ਗੁਰੂ ਅਰਜਨ ਦੇਵ ਜੀ

गुरुद्वारा डेहरा साहिब गुरु अर्जन देव जी

गुरुद्वारा डेहरा साहिब गुरु अर्जन देव जी लाहौर का एक अत्यंत पवित्र ऐतिहासिक स्थल है। यह वही स्थान है जहाँ सिखों के पाँचवें गुरु गुरु अर्जन देव जी ने 30 मई 1606 को अमानवीय यातनाएँ सहते हुए शहादत प्राप्त की। शाही मस्जिद के सामने स्थित यह गुरुद्वारा गुरु जी के सर्वोच्च बलिदान, धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति की जीवंत स्मृति है। आज भी यहाँ प्रतिदिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का पाठ होता है और शहीदी जोड़ मेले पर श्रद्धालु दूर-दूर से श्रद्धांजलि अर्पित करने आते हैं।

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Gurudwara Pehli Patshahi, Lahore | गुरुद्वारा पहली पातशाही, लाहौर

गुरुद्वारा पहली पातशाही, लाहौर

गुरुद्वारा पहली पातशाही, लाहौर वह ऐतिहासिक स्थान है जहाँ गुरु नानक देव जी ने भाई दूनी चंद को सच्चे धर्म का उपदेश दिया। यह गुरुद्वारा मानव सेवा, दान और आध्यात्मिक जागरूकता का प्रतीक है।

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