
गुरुद्वारा सेहरा साहिब, बस्सी
गुरुद्वारा सेहरा साहिब हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित एक पवित्र स्थान है, जहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने विवाह से पूर्व विश्राम किया और परंपरा अनुसार सेहरा धारण किया था।

गुरुद्वारा सेहरा साहिब हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित एक पवित्र स्थान है, जहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने विवाह से पूर्व विश्राम किया और परंपरा अनुसार सेहरा धारण किया था।

गुरुद्वारा श्री दस्तार अस्थान साहिब एक पवित्र स्थल है जहाँ कलगीधर पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज प्रकृति के बीच बैठकर अपनी दस्तार बाँधते थे। भंगाणी साहिब के युद्ध के बाद यहीं पीर बुधु शाह जी को गुरु जी द्वारा दस्तार और कंघा सिरोपा रूप में प्रदान किया गया, जो इस स्थान के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्त्व को दर्शाता है।

गुरुद्वारा कवि दरबार स्थान गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल है जहाँ कवियों को सम्मान और आशीर्वाद मिलता था।

गुरुद्वारा शेरगाह साहिब गुरुद्वारा शेरगाह साहिब साहस और वीरता का प्रतीक है। यह दसवें सिख

गुरुद्वारा सुहेला घोड़ा साहिब वर्ष 1635 में श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के आगमन का स्मारक है और जान भाई व सुहेला घोड़ा से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं को दर्शाता है।

गुरुद्वारा छोटा घल्लुघारा साहिब, गुरदासपुर के काहनुवान क्षेत्र के निकट स्थित है। यह स्थल 1746 ईस्वी के छोटे घल्लुघारे की स्मृति से जुड़ा है, जब मुगल अत्याचारों के दौरान हजारों सिखों ने अपने धर्म की रक्षा हेतु बलिदान दिया। यह गुरुद्वारा सिखों के साहस, त्याग और अडिग आस्था का प्रतीक माना जाता है।

गुरुद्वारा श्री पातशाही छेविं साहिब, नानकमत्ता वह पावन स्थल है जहाँ श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने बाबा अलमस्त जी की सहायता हेतु आगमन किया और गुरु नानक साहिब जी से जुड़ी स्मृतियों को पुनर्जीवित किया।

गुरुद्वारा क़िल्ला साहिब उत्तराखंड के बिदौरा गाँव में स्थित एक पावन स्थल है। यह उस स्थान की स्मृति है जहाँ गुरु हरगोबिंद साहिब जी बाबा अलमस्त जी की विनती पर पहुँचे और नानकमत्ता साहिब की ओर नंगे पाँव प्रस्थान किया।

गुरुद्वारा राजघाट पातशाही दसवीं, कुरुक्षेत्र में गुरु गोबिंद सिंह जी के 1702–03 के सूर्य ग्रहण मेले के आगमन की स्मृति में बना है। गुरु जी ने अंधविश्वास को चुनौती दी और सत्य, तर्क व आध्यात्मिक चेतना का संदेश दिया। आज यह गुरुद्वारा श्रद्धालुओं के लिए ज्ञान और भक्ति का केंद्र है।
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