Gurudwara Teer Garhi Sahib | गुरुद्वारा तीर गढ़ी साहिब | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਤੀਰ ਗੜ੍ਹੀ ਸਾਹਿਬ

गुरुद्वारा तीर गढ़ी साहिब

गुरुद्वारा तीर गढ़ी साहिब, भंगानी में स्थित वह ऐतिहासिक स्थान है जहाँ सन् 1688 में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने पहाड़ी राजाओं के विरुद्ध अपना पहला युद्ध लड़ा। यह स्थल सिख इतिहास में साहस, धर्म और न्याय की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

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Gurudwara Sehra Sahib

गुरुद्वारा सेहरा साहिब, बस्सी

गुरुद्वारा सेहरा साहिब हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित एक पवित्र स्थान है, जहां श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने विवाह से पूर्व विश्राम किया और परंपरा अनुसार सेहरा धारण किया था।

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Gurudwara Sri Dastar Asthan Sahib | गुरुद्वारा श्री दस्तार अस्थान साहिब | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਸ੍ਰੀ ਦਸਤਾਰ ਅਸਥਾਨ ਸਾਹਿਬ

गुरुद्वारा श्री दस्तार अस्थान साहिब

गुरुद्वारा श्री दस्तार अस्थान साहिब एक पवित्र स्थल है जहाँ कलगीधर पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज प्रकृति के बीच बैठकर अपनी दस्तार बाँधते थे। भंगाणी साहिब के युद्ध के बाद यहीं पीर बुधु शाह जी को गुरु जी द्वारा दस्तार और कंघा सिरोपा रूप में प्रदान किया गया, जो इस स्थान के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्त्व को दर्शाता है।

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गुरुद्वारा भंगानी साहिब, नाहन

गुरुद्वारा भंगानी साहिब, जिला नाहन, हिमाचल प्रदेश में स्थित एक ऐतिहासिक सिख तीर्थ है। यह स्थल 1688 ईस्वी में हुए प्रसिद्ध भंगानी युद्ध से जुड़ा है, जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने साहस, रणनीति और आस्था के बल पर विजय प्राप्त की। यह गुरुद्वारा गुरु जी के वीर योद्धाओं, खालसा की एकता और धर्म की रक्षा के लिए दिए गए बलिदान की स्मृति का प्रतीक है। श्रद्धालु यहाँ आकर गुरु गोबिंद सिंह जी की वीर गाथा और आध्यात्मिक विरासत को नमन करते हैं।

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Guru ka Lahore

गुरु का लाहौर – बिलासपुर

गुरु का लाहौर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित तीन ऐतिहासिक गुरुद्वारों का पवित्र समूह है। यह स्थल श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के विवाह से जुड़ा हुआ है, जहां 1677 में आनंद कारज संपन्न हुआ और आज भी यह श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है।

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गुरुद्वारा मणिकरण साहिब

परवती घाटी में स्थित गुरुद्वारा मणिकरण साहिब सिख और हिंदू दोनों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है। माना जाता है कि गुरु नानक देव जी ने यहाँ चमत्कार कर गर्म झरने प्रकट किए थे। आज भी ये झरने आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए यात्रियों को आकर्षित करते हैं।

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गुरुद्वारा पांवटा साहिब

गुरुद्वारा पांवटा साहिब, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना नदी के किनारे स्थित एक पवित्र सिख तीर्थस्थल है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहां चार वर्ष बिताए और दशम ग्रंथ के प्रमुख भाग लिखे। 1688 में हुए भंगानी युद्ध से जुड़ा यह गुरुद्वारा सिख वीरता और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। यहां गुरु जी के हथियार, एक स्वर्ण पालकी और ऐतिहासिक वस्तुओं का संग्रहालय है। लंगर सेवा रोज़ होती है और गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती व बैसाखी पर विशाल आयोजन होते हैं।

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