Gurudwara Suhela Ghora | गुरुद्वारा सुहेला घोड़ा

गुरुद्वारा सुहेला घोड़ा

गुरुद्वारा सुहेला घोड़ा साहिब वर्ष 1635 में श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के आगमन का स्मारक है और जान भाई व सुहेला घोड़ा से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं को दर्शाता है।

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Patshahi Chevin Sahib - Nanakmatta | गुरुद्वारा श्री पातशाही छेविं साहिब, नानकमत्ता | ਗੁਰੂਦੁਆਰਾ ਸ੍ਰੀ ਪਾਤਸ਼ਾਹੀ ਛੇਵੀਂ ਸਾਹਿਬ, ਨਾਨਕਮੱਤਾ

गुरुद्वारा श्री पातशाही छेविं साहिब, नानकमत्ता

गुरुद्वारा श्री पातशाही छेविं साहिब, नानकमत्ता वह पावन स्थल है जहाँ श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने बाबा अलमस्त जी की सहायता हेतु आगमन किया और गुरु नानक साहिब जी से जुड़ी स्मृतियों को पुनर्जीवित किया।

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Gurudwara Killa Sahib in Bidaura Village, Uttarakhand | गुरुद्वारा क़िल्ला साहिब | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਕਿੱਲਾ ਸਾਹਿਬ

गुरुद्वारा क़िल्ला साहिब

गुरुद्वारा क़िल्ला साहिब उत्तराखंड के बिदौरा गाँव में स्थित एक पावन स्थल है। यह उस स्थान की स्मृति है जहाँ गुरु हरगोबिंद साहिब जी बाबा अलमस्त जी की विनती पर पहुँचे और नानकमत्ता साहिब की ओर नंगे पाँव प्रस्थान किया।

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ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਛੇਵੀਂ ਪਾਤਸ਼ਾਹੀ ਸਾਹਿਬ, ਕੋਟਲੀ ਭਾਗਾ

गुरुद्वारा छेवीं पातशाही साहिब, कोटली भागा

गुरुद्वारा छेवीं पातशाही साहिब, कोटली भागा, वह पावन स्थल है जहाँ गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने विश्राम किया था। यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा आज भी सिख श्रद्धालुओं के लिए गहरी आध्यात्मिक आस्था और विरासत का प्रतीक है।

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Gurudwara Panjvin and Chhevin Patshahi, Pakistan | गुरुद्वारा पांचवीं और छेवीं पातशाही, ननकाना साहिब | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਪੰਜਵੀਂ ਅਤੇ ਛੇਵੀਂ ਪਾਤਸ਼ਾਹੀ, ਨਨਕਾਣਾ ਸਾਹਿਬ

गुरुद्वारा पांचवीं और छेवीं पातशाही, ननकाना साहिब

ननकाना साहिब में गुरुद्वारा तंबू साहिब के पास स्थित गुरुद्वारा पांचवीं और छेवीं पातशाही गुरु अर्जन देव जी और गुरु हरगोबिंद साहिब जी की पावन स्मृतियों से जुड़ा है। यह ऐतिहासिक स्थल अपनी सादगी, आध्यात्मिक गरिमा और सिख इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय के कारण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

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Gurudwara Chhevin Patshahi in Buzurgwal Village of Pakistan City | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਛੇਵੀਂ ਪਾਤਸ਼ਾਹੀ, ਬੁਜ਼ੁਰਗਵਾਲ

गुरुद्वारा छेवीं पातशाही, बज़ुर्गवाल

गुरुद्वारा छेवीं पातशाही, बज़ुर्गवाल सिख इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्थल है, जहां गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने कश्मीर से लौटते समय विश्राम किया था। समय के साथ यहां स्थित तीनों गुरुद्वारों में से दो पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं और तीसरे के केवल धुंधले अवशेष ही शेष हैं। आज यह स्थान बिना किसी स्पष्ट पहचान के उपेक्षित अवस्था में पड़ा हुआ है और स्थानीय लोगों की सहायता के बिना इसे पहचानना कठिन है।

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गुरुद्वारा छेवीं पातशाही, नराली

गुरुद्वारा छेवीं पातशाही, नराली

गुरुद्वारा छेवीं पातशाही, नराली रावलपिंडी ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक सिख स्थल है, जहाँ छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने प्रवास किया था। यह स्थान भाई हरबंस सिंह जी और उनके परिवार की गहरी श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। कभी यहाँ भव्य सरोवर और बरामदा हुआ करता था, जो समय के साथ नष्ट हो गए। आज भी यह स्थल अपने ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

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ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਕਾਲਾ ਮਾਲਾ ਸਾਹਿਬ, ਛਾਪਾ | Gurudwara Kala Mala Sahib

गुरुद्वारा काला माला साहिब, छापा

गुरुद्वारा काला माला साहिब, गाँव छापा (बरनाला) का एक ऐतिहासिक और पवित्र गुरुद्वारा है। माना जाता है कि गुरु हरगोबिंद साहिब जी यहाँ आए थे और बाबा श्रीचंद जी ने यहाँ ध्यान किया था। श्रद्धालु मानते हैं कि यहाँ के पवित्र सरोवर में स्नान करने से त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं। यहाँ प्रतिदिन कीर्तन और लंगर की व्यवस्था होती है तथा गुरुपुरब पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

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गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ साहिब – ग्वालियर किला, म.प्र

गुरु हरगोबिंद साहिब जी को जहाँगीर ने ग्वालियर किले में कैद किया था। रिहाई के समय, उन्होंने 52 राजाओं को एक विशेष चोले के जरिए मुक्त करवा कर बंदी छोड़ दाता की उपाधि पाई। गुरुद्वारा इस महान घटना की याद में बना है।

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