गुरुद्वारा सच्च खंड, फारूकाबाद

गुरुद्वारा सच्च खंड, फारूकाबाद

गुरुद्वारा सच्च खंड, चूहड़खाना के पास फ़ारूक़ाबाद के बाहरी क्षेत्र में स्थित है। यह स्थल गुरु नानक देव जी की यात्रा के दौरान घटित एक चमत्कारी प्रसंग की स्मृति से जुड़ा है। छोटा और अपेक्षाकृत कम जाना-पहचाना होने के बावजूद, यह गुरुद्वारा सच्चाई, विनम्रता और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है।

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Gurudwara Pehli Patshahi, Mirpur Khas, Pakistan | गुरुद्वारा पहली पातशाही, मीरपुर खास | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਪਹਿਲੀ ਪਾਤਸ਼ਾਹੀ, ਮੀਰਪੁਰ ਖਾਸ

गुरुद्वारा पहली पातशाही, मीरपुर खास

गुरुद्वारा पहली पातशाही मीरपुर खास, सिंध में स्थित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है, जहाँ प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी के चरण पड़े थे। यह भवन अब सक्रिय गुरुद्वारा नहीं है, फिर भी सिख इतिहास और आस्था में इसका विशेष स्थान है।

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गुरुद्वारा साहिब, कंगनपुर जिला-कसूर | Gurudwara Sahib, Kanganpur | ਗੁਰੂਦੁਆਰਾ ਸਾਹਿਬ, ਕੰਗਣਪੁਰ ਜਿਲਾ-ਕਸੂਰ

गुरुद्वारा साहिब, कंगनपुर जिला-कसूर

गुरुद्वारा साहिब, कंगनपुर जिला कसूर पाकिस्तान में स्थित एक महत्वपूर्ण सिख तीर्थ स्थल है, जिसे गुरुद्वारा माल जी साहिब भी कहा जाता है। यह स्थान गुरु नानक देव जी और भाई मरदाना की यात्रा तथा “वसदे रहो” और “उजड़ जाओ” वाली प्रसिद्ध साखी से जुड़ा हुआ है। 1939 में निर्मित यह गुरुद्वारा विभाजन से पहले धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा।

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गुरुद्वारा भाई खान चंद, मघियाना, झंग

गुरुद्वारा भाई खान चंद झंग के मघियाना क्षेत्र के चम्बेली बाज़ार में स्थित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल है, जो अपनी विरासत और वास्तुकला के लिए जाना जाता है।

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गुरुद्वारा गढ़ फ़तेह शाह, झांग

गुरुद्वारा गढ़ फ़तेह शाह, झांग

गुरुद्वारा गढ़ फ़तेह शाह पाकिस्तान के झांग ज़िले के गढ़ फ़तेह शाह गाँव में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। यह स्थान सिख इतिहास की उपस्थिति का साक्षी रहा है और आज भी स्थानीय लोगों के बीच “गुरुद्वारे वाली मस्जिद” के नाम से जाना जाता है। यहाँ इसके इतिहास, वर्तमान स्थिति और पहुँच मार्ग की जानकारी दी गई है।

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Gurudwara Bhai Hima Ji, Pakistan | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਭਾਈ ਹਿਮਾ ਜੀ, ਮਘੀਆਣਾ, ਝੰਗ

गुरुद्वारा भाई हिमा जी, मघियाना, झंग

गुरुद्वारा भाई हिमा जी, मघियाना, झंग में स्थित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सिख स्थल है, जिसे धर्मशाला हेमा जी महाराज भी कहा जाता है। यह गुरुद्वारा अपनी सुंदर लकड़ी की नक्काशी, प्रकाशस्थान और समय के साथ सेवा कार्यों में हुए परिवर्तन के लिए जाना जाता है।

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Gurudwara Bhai Phero Pakistan

गुरुद्वारा भाई फेरू, जिला कसूर

गुरुद्वारा भाई फेरो, लाहौर–मुल्तान रोड पर लाहौर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है। यह पवित्र स्थल भाई फेरू की गहरी श्रद्धा, सेवा भावना और सत्यनिष्ठा का प्रतीक माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण यह गुरुद्वारा आज भले ही जर्जर अवस्था में हो, फिर भी सिख इतिहास और विरासत में इसका विशेष स्थान है।

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Gurudwara Sadhu Bela, Sukkur | गुरुद्वारा साधु बेला, सुक्कुर | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਸਾਧੂ ਬੇਲਾ, ਸੁੱਕੁਰ

गुरुद्वारा साधु बेला, सुक्कुर

गुरुद्वारा साधु बेला, पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सुक्कुर और रोहरी के बीच सिंधु नदी के एक द्वीप पर स्थित एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल है। यह वही पावन स्थान है जहाँ अपनी यात्राओं के दौरान श्री गुरु नानक देव जी ठहरे और स्थानीय साधुओं को धर्म व सत्य का मार्ग दिखाया। नाव द्वारा ही पहुँचा जाने वाला यह गुरुद्वारा अपने शांत वातावरण, धर्म मंदिर और उदासी साधुओं की समाधियों के लिए प्रसिद्ध है।

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Gurudwara Sahib, Daftu Distt- Kasur

गुरुद्वारा साहिब, दफ्तु जिला- कसूर

गुरुद्वारा साहिब दफ्तू, जिला कसूर, ललियानी के पास स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। यह वही स्थान माना जाता है जहाँ बाबा बुल्ले शाह ने निर्वासन के समय शरण ली थी। किले जैसी विशाल संरचना वाला यह गुरुद्वारा कभी 80 स्क्वायर भूमि से संपन्न था, जो बीबी ईशर कौर द्वारा दान की गई थी। आज यह स्थल ऐतिहासिक महत्व रखता है, हालांकि वर्तमान में यह बंद है और नियमित तीर्थयात्रा के लिए संचालित नहीं होता।

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