
गुरुद्वारा बाबे दी बेर साहिब
गुरुद्वारा बाबे दी बेर साहिब सियालकोट, पाकिस्तान में स्थित एक ऐतिहासिक स्थान है जहाँ गुरु नानक देव जी ने प्रवास किया और संत हमज़ा ग़ौस से भेंट की। यहाँ आज भी वह पवित्र बेर का पेड़ मौजूद है जिसके नीचे गुरु जी ठहरे थे।

गुरुद्वारा बाबे दी बेर साहिब सियालकोट, पाकिस्तान में स्थित एक ऐतिहासिक स्थान है जहाँ गुरु नानक देव जी ने प्रवास किया और संत हमज़ा ग़ौस से भेंट की। यहाँ आज भी वह पवित्र बेर का पेड़ मौजूद है जिसके नीचे गुरु जी ठहरे थे।

गुरुद्वारा चौवा साहिब रोहतास किले के पास झेलम में स्थित एक ऐतिहासिक स्थल है। मान्यता है कि यहाँ गुरु नानक देव जी ने अपनी उदासी के दौरान धरती से जल का स्रोत प्रकट किया था।

गुरुद्वारा श्री गुरु नानक साहिब मखदूम पुर, पाकिस्तान के खानेवाल जिले में स्थित एक ऐतिहासिक स्थान है। यहाँ गुरु नानक देव जी ने सज्जन ठग को उपदेश देकर उसके जीवन को बदल दिया, जिसके बाद उसकी सराय को गुरुद्वारे में परिवर्तित कर दिया गया।

गुरुद्वारा पंजा साहिब पाकिस्तान के हसन अब्दाल शहर में स्थित सिखों का एक प्रसिद्ध और पवित्र तीर्थ स्थल है। यह स्थान गुरु नानक देव जी से जुड़ा हुआ है और यहाँ एक पत्थर पर उनके हाथ की छाप मानी जाती है। यह गुरुद्वारा उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है जब गुरु जी ने चमत्कार के रूप में पानी का चश्मा प्रकट किया और फेंके गए पत्थर को अपने हाथ से रोक लिया। आज यह स्थल दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान है।

गुरुद्वारा रोड़ी साहिब, एमिनाबाद (पाकिस्तान) में स्थित एक ऐतिहासिक सिख तीर्थ स्थल है। यह वही स्थान है जहाँ 1521 में बाबर के पंजाब पर आक्रमण के समय गुरु नानक देव जी कंकड़ों पर बैठकर प्रभु का सिमरन कर रहे थे और बाद में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। यह गुरुद्वारा उस घटना की स्मृति में बनाया गया था और आज भी सिख इतिहास की एक महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है।

गुरुद्वारा शहीद गंज सिंह सिंघनिया लाहौर के नौलखा बाज़ार में स्थित है। यह स्थान 18वीं शताब्दी में शहीद हुए हजारों सिख पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की शहादत की स्मृति में बना है। यह गुरुद्वारा गुरुद्वारा भाई तरु सिंह के सामने स्थित है और सिख इतिहास में साहस और अटूट आस्था का प्रतीक माना जाता है।

गुरुद्वारा गुरु अमरदास, धुन्नी सिखों के तीसरे गुरु की स्मृति से जुड़ा पवित्र स्थल है। यहाँ गुरु अमरदास जी का पवित्र जूता सुरक्षित रहा, जिसे रोग निवारण से भी जोड़ा जाता है।

गुरुद्वारा तंबू साहिब गुरु नानक देव जी के जीवन की उस घटना से जुड़ा है जब उन्होंने अपने पिता द्वारा दिए गए धन से भूखे साधुओं को भोजन कराया। यह पवित्र स्थल गुरुद्वारा जन्म अस्थान से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित है और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।

गुरुद्वारा भाई लालू जी ततले आली गाँव, गुजरांवाला ज़िला, पाकिस्तान में स्थित एक ऐतिहासिक सिख धरोहर है, जिसका निर्माण 1939 ईस्वी में हुआ था।
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