Gurudwara Baher Sahib | गुरुद्वारा बहेर साहिब | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਬਹੇੜ ਸਾਹਿਬ

गुरुद्वारा बहेर साहिब

गुरुद्वारा बहेर साहिब, जिसे गुरुद्वारा साहिब पातशाही नौवीं भी कहा जाता है, फतेहगढ़ साहिब के निकट बहेर गांव में स्थित है। यह पवित्र स्थान श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की यात्रा और उस चमत्कारी घटना से जुड़ा है, जिसमें गुरु जी ने एक वृद्ध महिला के मृत प्रतीत होने वाले पुत्र को जीवनदान दिया था। आज यह गुरुद्वारा श्रद्धालुओं के लिए आस्था और गुरु कृपा का महत्वपूर्ण केंद्र है।

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Gurudwara Manji Sahib, Kanech | गुरुद्वारा मंजी साहिब, कनेच | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਮੰਜੀ ਸਾਹਿਬ, ਕਨੇਚ

गुरुद्वारा मंजी साहिब, कनेच

गुरुद्वारा मंजी साहिब, कनेच, वह पावन स्थान है जहां दिसंबर 1705 में गुरु गोबिंद सिंह जी माछीवाड़ा से प्रस्थान के बाद कुछ समय के लिए रुके थे। फत्ता किसान और उसके घोड़े से जुड़ी ऐतिहासिक घटना गुरु जी की दिव्य दृष्टि और सर्वज्ञता को दर्शाती है। यहां गुरु नानक देव जी, गुरु अर्जन देव जी और गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व तथा गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।

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गुरुद्वारा ढाबसर साहिब – गोह

गुरुद्वारा ढाबसर साहिब, गाँव गोह में स्थित एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा है, जो गुरु हरगोबिंद साहिब जी की पावन यात्रा से जुड़ा हुआ है। यहीं से गुरु जी ने एक खूंखार शेर की खोज शुरू की थी और उसके आतंक से क्षेत्र के लोगों को मुक्त कराया था। यह गुरुद्वारा उनकी वीरता और मानव सेवा की स्मृति को संजोए हुए है।

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गुरुद्वारा टूटी गंडी साहिब

गुरुद्वारा टूटी गंडी साहिब, श्री मुक्तसर साहिब में स्थित एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा है, जो चाली मुक्तों की शहादत और गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा उन्हें प्रदान की गई क्षमा की स्मृति को समर्पित है। यह पवित्र स्थान सिख इतिहास में त्याग, वीरता और गुरु-शिष्य संबंध की महान मिसाल के रूप में जाना जाता है।

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ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਸ੍ਰੀ ਹਾਜੀ ਰਤਨ ਸਾਹਿਬ | गुरुद्वारा श्री हाजी रतन साहिब | Gurudwara Shri Haji Ratan Sahib - Bhatinda

गुरुद्वारा श्री हाजी रतन साहिब

गुरुद्वारा श्री हाजी रतन साहिब, बठिंडा में स्थित एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा है, जहां गुरु गोबिंद सिंह जी 1706 में तलवंडी साबो जाते समय ठहरे थे। यह स्थान हाजी रतन के साथ हुए आध्यात्मिक संवाद, अंधविश्वासों के खंडन और गुरु जी की दिव्य शिक्षाओं से जुड़ा हुआ है। आज यह श्रद्धालुओं के लिए आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है।

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ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਭਾਈ ਬਹਿਲੋ ਸਾਹਿਬ | गुरुद्वारा भाई बहलो साहिब | Gurudwara Bhai Behlo Sahib

गुरुद्वारा भाई बहलो साहिब

गुरुद्वारा भाई बहलो साहिब, फफड़े भाईके, भाई बहलो जी के जन्म स्थान की याद में स्थापित है। यह पवित्र स्थल उनकी निःस्वार्थ सेवा और गुरु अर्जन देव जी द्वारा दिए गए आशीर्वाद से जुड़ा हुआ है। यहां प्रमुख सिख गुरुपर्व और शहीदी दिवस श्रद्धापूर्वक मनाए जाते हैं तथा श्रद्धालुओं के लिए सराय की सुविधा भी उपलब्ध है।

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Gurudwara Tibbi Sahib, Muktsar | गुरुद्वारा टिब्बी साहिब - मुक्तसर | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਟਿੱਬੀ ਸਾਹਿਬ - ਮੁਕਤਸਰ

गुरुद्वारा टिब्बी साहिब – मुक्तसर

गुरुद्वारा टिब्बी साहिब, श्री मुक्तसर साहिब के निकट स्थित एक पवित्र ऐतिहासिक स्थल है, जो गुरु गोबिंद सिंह जी और चाली मुक्तों की वीरता व बलिदान से जुड़ा हुआ है। यहां माघ मेला, गुरुपर्व और प्रमुख सिख त्योहार बड़ी श्रद्धा से मनाए जाते हैं।

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Gurudwara Manji Sahib – Sri Hargobindpur | गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब - श्री हरगोबिंदपुर | ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਸ੍ਰੀ ਮੰਜੀ ਸਾਹਿਬ - ਸ੍ਰੀ ਹਰਗੋਬਿੰਦਪੁਰ

गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब – श्री हरगोबिंदपुर

गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब, श्री हरगोबिंदपुर वह पावन स्थान है जहाँ गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने अपने निवास हेतु घर बनवाया था। यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा आज भी गुरु साहिब की पवित्र यादों और मिरी-पीरी के संदेश को संजोए हुए है।

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ਗੁਰਦੁਆਰਾ ਛੇਵੀਂ ਪਾਤਸ਼ਾਹੀ, ਬਸਤੀ ਸ਼ੇਖ, ਜਲੰਧਰ | Gurudwara Chevin Padshahi in Basti Shaikh, Jalandhar | गुरुद्वारा छेवीं पातशाही, बस्ती शेख, जालंधर

गुरुद्वारा छेवीं पातशाही, जालंधर

गुरुद्वारा छेवीं पातशाही, बस्ती शेख, जालंधर वह पवित्र स्थान है जहां श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने मुस्लिम संत शेख दरवेश से मुलाकात की थी। यह गुरुद्वारा सांप्रदायिक सौहार्द, आध्यात्मिक विचारों और आपसी सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

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