गुरुद्वारा शेरगाह साहिब

गुरुद्वारा शेरगाह साहिब साहस और वीरता का प्रतीक है। यह दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी की स्मृति में स्थापित किया गया है। मान्यता है कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहाँ एक आदमखोर शेर का वध किया था। यह गुरुद्वारा हिमाचल प्रदेश के सिरमौर ज़िले में स्थित है और गुरुद्वारा पांवटा साहिब से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर है।

कथा के अनुसार, एक दिन जब गुरु गोबिंद सिंह जी सिरमौर क्षेत्र में थे, तब वे नाहन के राजा मेदिनी प्रकाश और गढ़वाल के राजा फतेह शाह से मिलने जा रहे थे। उसी समय एक ग्रामीण ने उनसे गाँव वालों को एक आदमखोर शेर से बचाने की प्रार्थना की। गुरु गोबिंद सिंह जी ने एक ही तलवार के वार से उस आदमखोर शेर का सिर काट दिया। इस महान पराक्रम के लिए गुरु जी की बहुत प्रशंसा हुई। इसी वीरतापूर्ण कार्य की स्मृति में बाद में गुरुद्वारा शेरगाह साहिब का निर्माण किया गया।

गुरुद्वारा शेरगाह साहिब तक पहुँचने के लिए आप अपनी सुविधा और स्थान के अनुसार विभिन्न परिवहन साधनों का उपयोग कर सकते हैं। नीचे उपलब्ध विकल्प दिए गए हैं:

कार या टैक्सी द्वारा: आप GPS या मोबाइल मैप्स ऐप की सहायता से गाड़ी चलाकर गुरुद्वारा साहिब तक पहुँच सकते हैं। गुरुद्वारा शेरगाह साहिब सिरमौर ज़िले में स्थित है और यह गुरुद्वारा पांवटा साहिब से लगभग 12 किलोमीटर दूर है। सही दिशा के लिए गुरुद्वारा का पता मैप में दर्ज करें।

रेल द्वारा: निकटतम रेलवे स्टेशन देहरादून रेलवे स्टेशन है, जो लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित है। वहाँ से आप टैक्सी या बस लेकर गुरुद्वारा साहिब पहुँच सकते हैं।

बस द्वारा: प्रमुख शहरों से पांवटा साहिब बस स्टैंड के लिए नियमित बस सेवाएँ उपलब्ध हैं। बस स्टैंड से गुरुद्वारा साहिब आसानी से पहुँचा जा सकता है।

हवाई मार्ग से: सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जो लगभग 85 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से टैक्सी और बस की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

यात्रा पर निकलने से पहले अपने स्थान के अनुसार परिवहन विकल्पों और समय-सारिणी की जानकारी अवश्य जाँच लें। साथ ही वर्तमान परिस्थितियों को भी ध्यान में रखें।

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