गुरुद्वारा रेवालसर साहिब
रेवालसर में स्थित गुरुद्वारा रेवालसर साहिब एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक स्थल है, जो मंडी से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान गुरु गोबिंद सिंह जी की पावन यात्रा की स्मृति में स्थापित किया गया है, जब वे पहाड़ी राजाओं से मिलने यहाँ आए थे, ताकि वे सब मिलकर औरंगज़ेब के अत्याचारों के विरुद्ध एकजुट हो सकें।
गुरु जी अपनी दिव्य दृष्टि से पहले ही उनके इरादों को जानते थे, फिर भी उन्होंने यह सभा इस उद्देश्य से आयोजित की ताकि सभी के सामने उनकी वास्तविकता प्रकट हो सके। प्रारंभ में राजाओं ने साथ देने की सहमति जताई और अमृत छकने की इच्छा भी व्यक्त की, जो आध्यात्मिक एकता और समानता का प्रतीक है।
किन्तु उन्होंने एक शर्त रखी कि उन्हें अमृत अलग खंडा-बाता (लोहे के बर्तन) में दिया जाए, जिससे उनकी सामाजिक स्थिति बनी रहे। इस पर गुरु गोबिंद सिंह जी ने स्पष्ट रूप से इंकार कर दिया और कहा कि अमृत सबके लिए एक समान है और इसे एक ही पात्र से ग्रहण किया जाना चाहिए। जब वे इस बात पर अड़े रहे, तो यह गठबंधन टूट गया।
उनकी समानता को स्वीकार न करने की प्रवृत्ति ने उनके अहंकार और विभाजन को उजागर कर दिया। बाद में इन्हीं में से कई राजाओं ने औरंगज़ेब का साथ दिया और गुरु जी के विरुद्ध युद्ध किया।
यह गुरुद्वारा रेवालसर झील के किनारे स्थित है, जो अपनी शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है। पत्थरों से निर्मित इस गुरुद्वारे तक पहुँचने के लिए 108 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। यहाँ विभिन्न धर्मों के श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ दर्शन करने आते हैं।
रेवालसर का महत्व केवल सिख धर्म तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हिन्दू और बौद्ध धर्म में भी अत्यंत पूजनीय है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार पांडव ने अपने वनवास के दौरान इस झील का निर्माण किया था, और इसे आध्यात्मिक तथा उपचारात्मक गुणों से युक्त माना जाता है।
बौद्ध धर्म में यह स्थान गुरु पद्मसंभव से जुड़ा हुआ है, जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने यहाँ तपस्या की और ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने तिब्बत में बौद्ध धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे यह स्थान तिब्बती बौद्धों के लिए भी एक प्रमुख तीर्थ स्थल बन गया।
रेवालसर में स्थित गुरुद्वारा रेवालसर साहिब तक पहुंचने के लिए आप अपनी सुविधा के अनुसार विभिन्न यात्रा विकल्प चुन सकते हैं। यहाँ कुछ प्रमुख तरीके दिए गए हैं:
सड़क मार्ग से: रेवालसर सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। मंडी से, जो लगभग 24 किमी दूर है, नियमित बसें और टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं। निजी वाहन से भी आप आराम से गुरुद्वारे तक पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से: निकटतम रेलवे स्टेशन जोगिंदर नगर रेलवे स्टेशन है, जो रेवालसर से लगभग 80 किमी दूर स्थित है। वहां से आप टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या बस द्वारा गुरुद्वारा पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग से: सबसे नजदीकी हवाई अड्डा कुल्लू-मनाली एयरपोर्ट (भुंतर) है, जो लगभग 60 किमी दूर है। एयरपोर्ट से टैक्सी लेकर आप सीधे गुरुद्वारा पहुंच सकते हैं।
पैदल मार्ग से: रेवालसर कस्बे में पहुंचने के बाद गुरुद्वारा थोड़ी पैदल दूरी पर स्थित है। यह एक पहाड़ी पर स्थित है, जहाँ तक पहुँचने के लिए 108 पत्थर की सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
यात्रा की योजना बनाने से पहले स्थानीय परिवहन विकल्पों और मौसम की स्थिति की जानकारी अवश्य जांच लें, विशेष रूप से मानसून और सर्दियों के मौसम में।
अन्य नजदीकी गुरुद्वारे
- गुरुद्वारा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी, मंडी - 24.5 km


