गुरुद्वारा बेर साहिब, सुल्तानपुर लोधी
गुरुद्वारा बेर साहिब, सुल्तानपुर लोधी, गुरु नानक देव जी से जुड़ा एक अत्यंत पवित्र स्थल है। सुल्तानपुर लोधी में अपने प्रवास के दौरान गुरु नानक देव जी प्रतिदिन प्रातःकाल बेईं नदी के किनारे स्नान और ध्यान करने के लिए आते थे। मान्यता है कि इसी स्थान पर वे एक बेर के वृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान करते थे, और वह वृक्ष आज भी उस दिव्य स्मृति का प्रतीक है। इस स्थान पर बाद में कपूरथला रियासत के संस्थापक बाबा जस्सा सिंह अहलूवालिया ने गुरुद्वारे का निर्माण करवाया। वर्तमान संगमरमर और मोज़ेक से बना भवन 1938 में बनना शुरू हुआ और 1942 में पूर्ण हुआ, जो इसकी आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है।
सिख परंपरा के अनुसार एक दिन बेईं नदी में स्नान करते समय गुरु नानक देव जी को दिव्य अनुभूति हुई। वे जल में लुप्त हो गए और तीन दिन बाद प्रकट हुए। इसके बाद उन्होंने यह संदेश दिया कि न कोई हिंदू है और न कोई मुसलमान, सभी मनुष्य एक हैं। इसी घटना से उनके उस महान मिशन की शुरुआत मानी जाती है जिसमें उन्होंने एक परमात्मा, समानता और मानवता के भाईचारे का संदेश दिया।
नगर का काजी मुसलमानों में एक विद्वान व्यक्ति माना जाता था। उसने गुरु जी से कहा कि यदि वे हिंदू और मुसलमान में कोई भेद नहीं मानते तो उनके साथ मस्जिद में नमाज़ अदा करें। गुरु नानक देव जी काजी के साथ मस्जिद गए। सभी लोगों ने नमाज़ अदा की, लेकिन गुरु जी शांत खड़े रहे। जब काजी ने इसका कारण पूछा तो गुरु जी ने बताया कि काजी का मन नमाज़ में नहीं था, बल्कि वह अपने नवजात बछेड़े की चिंता कर रहा था कि कहीं वह कुएँ में न गिर जाए। गुरु जी ने समझाया कि सच्ची प्रार्थना के लिए मन का पूर्ण एकाग्र और समर्पित होना आवश्यक है।
गुरु जी के वचनों ने लोगों को गहराई से प्रभावित किया और उन्होंने उनकी शिक्षाओं की आध्यात्मिक महत्ता को समझा। आज सुल्तानपुर लोधी एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहाँ श्रद्धालु गुरु नानक देव जी के प्रारंभिक उपदेशों और उनके दिव्य संदेश से जुड़ने के लिए आते हैं।
पंजाब के सुल्तानपुर लोधी स्थित गुरुद्वारा बेर साहिब तक आप इस प्रकार पहुंच सकते हैं:
कार द्वारा: गुरुद्वारा बेर साहिब सुल्तानपुर लोधी में स्थित है, जो अमृतसर से लगभग 75 किमी और चंडीगढ़ से 150 किमी दूर है। आप NH3 (अमृतसर-कपूरथला रोड) के ज़रिए आसानी से गुरुद्वारे तक पहुँच सकते हैं। सड़क मार्ग अच्छी तरह से बना हुआ है और यात्रा के दौरान ग्रामीण इलाकों के मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन सुल्तानपुर लोधी रेलवे स्टेशन है, जो गुरुद्वारे से लगभग 2-3 किमी दूर है। आप स्टेशन से गुरुद्वारे तक पहुँचने के लिए टैक्सी या ऑटो-रिक्शा किराए पर ले सकते हैं।
बस द्वारा: आप अमृतसर, जालंधर या आस-पास के शहरों से सुल्तानपुर लोधी के लिए बस ले सकते हैं। बस स्टैंड से गुरुद्वारा थोड़ी ही दूरी पर है, और आप स्थानीय टैक्सी या ऑटो-रिक्शा किराए पर ले सकते हैं।
हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा अमृतसर स्थित श्री गुरु रामदास जी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 75 किलोमीटर दूर है। हवाई अड्डे से आप सुल्तानपुर लोधी के लिए टैक्सी या बस ले सकते हैं।
यात्रा शुरू करने से पहले, अपने स्थान के अनुसार वर्तमान परिवहन कार्यक्रम और उपलब्धता की जाँच कर लेना उचित है। सुल्तानपुर लोधी पहुँचने पर, स्थानीय लोग आपको गुरुद्वारा बेर साहिब तक पहुँचने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि यह उस क्षेत्र का एक प्रसिद्ध स्थल है।
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