गुरुद्वारा क़िल्ला साहिब

गुरुद्वारा क़िल्ला साहिब उस पवित्र स्थान की स्मृति में स्थापित है, जहाँ गुरु हरगोबिंद साहिब जी, भाई जेठा जी, भाई पैदा जी, भाई बीधी चंद जी, भाई गट्टू जी, भाई नागाहा जी तथा अन्य श्रद्धालु सिखों के साथ, बाबा अलमस्त जी की विनती पर अमृतसर से पहुँचे थे। बाबा अलमस्त जी, गुरु नानक साहिब जी के परम भक्त थे और नानकमत्ता के पवित्र स्थल की सेवा और देखरेख कर रहे थे। परंतु कुछ गोरखपंथी साधुओं ने बलपूर्वक उस स्थान पर कब्ज़ा कर लिया और बाबा अलमस्त जी को वहाँ से निकाल दिया।

इस अन्याय से व्यथित होकर बाबा अलमस्त जी इस स्थान पर आए और गुरु साहिब से सहायता की अरदास की। गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने तुरंत अपने संगियों के साथ प्रस्थान किया और इस स्थान पर पहुँचकर अपने घोड़ों को लकड़ी के खूंटों—‘क़िल्ले’—से बाँध दिया, जो आगे चलकर वृक्ष बन गए। श्रद्धा स्वरूप उन्होंने अपने जूते उतारे और नंगे पाँव नानकमत्ता साहिब की ओर बढ़े, ताकि वहाँ उत्पन्न स्थिति का समाधान किया जा सके।

यह गुरुद्वारा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सच्चे मन और शुद्ध भावना से की गई अरदास को गुरु सदैव स्वीकार करते हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

गुरुद्वारा क़िल्ला साहिब बिदौरा गाँव में स्थित है और यह उत्तराखंड के गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब से लगभग 6 किमी की दूरी पर है। वहाँ पहुँचने के लिए निम्नलिखित विकल्प उपलब्ध हैं:

सड़क मार्ग से: गुरुद्वारा क़िल्ला साहिब नानकमत्ता से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। स्थानीय टैक्सी, ऑटो-रिक्शा या निजी वाहन से 10–15 मिनट में स्थल तक पहुँचा जा सकता है।

रेल मार्ग से: निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन रुद्रपुर सिटी रेलवे स्टेशन है। वहाँ से टैक्सी लेकर बिदौरा गाँव होते हुए गुरुद्वारा साहिब पहुँचा जा सकता है।

वायु मार्ग से: पंतनगर हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है। हवाई अड्डे से टैक्सी द्वारा पहले नानकमत्ता और फिर वहाँ से बिदौरा गाँव पहुँचा जा सकता है।

यात्रा पर निकलने से पहले अपनी प्रारंभिक जगह और वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार परिवहन विकल्पों और समय-सारिणी की जानकारी अवश्य जाँच लें।

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