गुरुद्वारा शिकार घाट साहिब
गुरुद्वारा शिकार घाट साहिब महाराष्ट्र के नांदेड़ में पवित्र गोदावरी नदी के किनारे स्थित सिख धर्म के सबसे शांत और ऐतिहासिक गुरुद्वारों में से एक है। हरियाली से घिरी पहाड़ियों और प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित यह पावन स्थल तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गोदावरी नदी पर कार सेवा द्वारा बनाया गया पुल श्रद्धालुओं को इस पवित्र स्थान तक पहुँचाता है और इसकी आध्यात्मिक सुंदरता को और भी बढ़ाता है।
यह पावन स्थल गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना से जुड़ा हुआ है। सिख परंपरा के अनुसार, गुरु साहिब एक बार शिकार के दौरान इस क्षेत्र में आए थे। उसी समय गुरु जी ने एक खरगोश को अपने तीर से मारा। मान्यता है कि वह खरगोश सियालकोट के भाई मूला का पुनर्जन्म था, जिन्होंने कभी गुरु नानक देव जी के साथ यात्राएँ की थीं।
इतिहास के अनुसार, एक बार जब गुरु नानक देव जी भाई मूला से मिलने गए, तो भाई मूला इस डर से छिप गए कि कहीं गुरु जी उन्हें फिर किसी लंबी यात्रा पर साथ न ले जाएँ। गुरु जी शांतिपूर्वक वहाँ से चले गए, लेकिन कुछ समय बाद भाई मूला की सर्पदंश से मृत्यु हो गई। पश्चाताप और आध्यात्मिक बोझ के कारण उनकी आत्मा कई जन्मों तक भटकती रही। अंततः गुरु गोबिंद सिंह जी ने इसी स्थान पर अपने तीर के स्पर्श से उनकी आत्मा को मुक्ति प्रदान की। इसी पावन घटना के कारण यह स्थान गुरुद्वारा शिकार घाट साहिब के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
गुरुद्वारे के वर्तमान भवन का पुनर्निर्माण और विकास 1960 और 1970 के दशक में बाबा जीवन सिंह और बाबा दलिप सिंह कार सेवावालों द्वारा कराया गया। गुरुद्वारे की वास्तुकला पारंपरिक सिख शैली और आध्यात्मिक सुंदरता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश एक विशाल संगमरमर से सजे दरबार हॉल के मध्य स्थित है। पूरे गुरुद्वारे का बाहरी भाग सफेद संगमरमर से ढका हुआ है, जो इसे अत्यंत शांत और दिव्य स्वरूप प्रदान करता है।
आज गुरुद्वारा शिखर घाट साहिब नांदेड़ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है। इसकी शांतिमय वातावरण, ऐतिहासिक महत्व और आध्यात्मिक आभा श्रद्धालुओं को सिख इतिहास और गुरुओं की शिक्षाओं से गहराई से जोड़ती है।
गुरुद्वारा शिकार घाट साहिब पहुँचने के लिए आप अपनी सुविधा और स्थान के अनुसार विभिन्न परिवहन साधनों का उपयोग कर सकते हैं। यहाँ कुछ विकल्प दिए गए हैं:
कार द्वारा: गुरुद्वारा शिखर घाट साहिब महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर में तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। श्रद्धालु अच्छी तरह जुड़ी सड़कों के माध्यम से कार या टैक्सी द्वारा आसानी से गुरुद्वारे तक पहुँच सकते हैं। गोदावरी नदी पर बना पुल गुरुद्वारे तक सुविधाजनक पहुँच प्रदान करता है।
रेल द्वारा: निकटतम रेलवे स्टेशन हजूर साहिब नांदेड़ रेलवे स्टेशन है, जो भारत के कई प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशन से श्रद्धालु टैक्सी, ऑटो-रिक्शा या स्थानीय परिवहन द्वारा गुरुद्वारे तक पहुँच सकते हैं।
बस द्वारा: महाराष्ट्र और आसपास के राज्यों के कई शहरों से नांदेड़ के लिए नियमित बस सेवाएँ उपलब्ध हैं। नांदेड़ बस स्टैंड पहुँचने के बाद श्रद्धालु टैक्सी या ऑटो-रिक्शा लेकर गुरुद्वारा शिकार घाट साहिब पहुँच सकते हैं।
हवाई मार्ग द्वारा: निकटतम हवाई अड्डा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी हवाई अड्डा है। यह हवाई अड्डा कुछ घरेलू उड़ानों से जुड़ा हुआ है। हवाई अड्डे से टैक्सी और स्थानीय परिवहन आसानी से उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से गुरुद्वारे तक पहुँचा जा सकता है।
यात्रा पर निकलने से पहले अपने स्थान के अनुसार वर्तमान परिवहन समय-सारणी और उपलब्धता की जानकारी अवश्य जाँच लें। इसके अतिरिक्त, नांदेड़ पहुँचने के बाद स्थानीय लोगों से मार्गदर्शन लेने में संकोच न करें, क्योंकि यह गुरुद्वारा क्षेत्र का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है।
अन्य नजदीकी गुरुद्वारे
- गुरुद्वारा माता जीत कौर जी - 2.0 k.m
- डेरा बाबा ज्वाला सिंह जी - 2.7 k.m
- गुरुद्वारा हीरा घाट साहिब - 5.6 k.m
- तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब - 6.0 k.m


