गुरुद्वारा बाबे दी बेर साहिब

गुरुद्वारा बेरी साहिब, जिसे गुरुद्वारा बाबे दी बेर साहिब भी कहा जाता है, पाकिस्तान के सियालकोट शहर में स्थित है। यह वह पवित्र स्थान है जहाँ प्रथम सिख गुरु, गुरु नानक देव जी ठहरे थे और उन्होंने सियालकोट के प्रसिद्ध सूफी संत हमज़ा ग़ौस से मुलाकात की थी।

यहाँ आज भी वह बेर (बेरी) का पेड़ मौजूद है, जिसके नीचे गुरु नानक देव जी ने विश्राम किया था। इस गुरुद्वारे का निर्माण नाथा सिंह द्वारा करवाया गया था। गुरुद्वारा परिसर में एक सुंदर बाग, सरोवर (तालाब) और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए कमरे भी बनाए गए हैं।

2010 के दशक में इस गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया, जिसके बाद इसे दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया।

गुरुद्वारा साहिब तक पहुँचने के लिए आप निम्न विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं:

कार द्वारा: यदि आप लाहौर से यात्रा कर रहे हैं, तो लाहौर–सियालकोट मोटरवे (M11) का उपयोग करें। यह लगभग 2 घंटे की यात्रा है। सियालकोट पहुँचने के बाद “Gurudwara Babe Di Ber Sahib, Sialkot” को GPS ऐप में डालकर आसानी से पहुँचा जा सकता है।

ट्रेन से: सियालकोट जंक्शन रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन लें। वहाँ पहुँचने के बाद आप टैक्सी या स्थानीय रिक्शा लेकर बाबे दी बेर क्षेत्र में स्थित गुरुद्वारा साहिब तक पहुँच सकते हैं।

बस से: सियालकोट शहर लाहौर और गुजरांवाला जैसे शहरों से बस सेवाओं द्वारा जुड़ा हुआ है। सियालकोट बस टर्मिनल पहुँचने के बाद, आप स्थानीय टैक्सी लेकर गुरुद्वारा साहिब पहुँच सकते हैं।

हवाईजहाज से: निकटतम हवाई अड्डा सियालकोट इंटरनेशनल एयरपोर्ट (SKT) है, जो लगभग 20 किमी दूर स्थित है। एयरपोर्ट से आप कैब लेकर गुरुद्वारा साहिब तक पहुँच सकते हैं।

यात्रा शुरू करने से पहले, अपने स्थान के अनुसार वर्तमान परिवहन समय-सारणी और उपलब्धता की जांच करना उचित है। भारतीय नागरिकों को पाकिस्तान जाने के लिए वैध वीज़ा की आवश्यकता होती है, जिसमें यात्रा का उद्देश्य (तीर्थ यात्रा) स्पष्ट रूप से उल्लेखित होना चाहिए। पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में यात्रा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा अनुमति की आवश्यकता हो सकती है, इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले संबंधित अधिकारियों से जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

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