गुरुद्वारा पंजा साहिब
गुरुद्वारा पंजा साहिब (पंजाबी: गुरुद्वारा पंजा साहिब; शाहमुखी: گردوارا پنجا صاحب; उर्दू: گردوارہ پنجہ صاحب) पाकिस्तान के शहर हसन अब्दाल में स्थित एक प्रसिद्ध और ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। यह पवित्र स्थान सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी से जुड़ा हुआ है। इस गुरुद्वारे की सबसे बड़ी विशेषता वह पत्थर है जिस पर सिख परंपरा के अनुसार गुरु नानक देव जी के हाथ की छाप मानी जाती है।
सिख परंपरा के अनुसार श्री गुरु नानक देव जी भई मरदाना जी के साथ संवत 1578 बिक्रमि के बैसाख महीने में (लगभग 1521 ईस्वी) हसन अब्दाल पहुंचे थे। उस समय यहां एक प्रसिद्ध फकीर शाह वली कंधारी रहता था। बाद में सिख साम्राज्य के प्रसिद्ध सेनापति हरी सिंह नलवा ने इस स्थान का नाम पंजा साहिब रखा और यहां पहला गुरुद्वारा बनवाने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। आगे चलकर महाराजा रणजीत सिंह के समय इस पवित्र स्थल का और अधिक विकास और संरक्षण किया गया।
कथा
कहा जाता है कि गुरु नानक देव जी और भई मरदाना जी एक ठंडी छाया वाले पेड़ के नीचे बैठकर कीर्तन कर रहे थे। धीरे-धीरे उनके आसपास संगत एकत्र होने लगी। यह बात पास में रहने वाले फकीर शाह वली कंधारी को अच्छी नहीं लगी।
कथा के अनुसार गुरु नानक देव जी ने भई मरदाना जी को पानी लाने के लिए शाह वली कंधारी के पास भेजा। भई मरदाना जी ने विनम्रता से पानी मांगा, लेकिन उसने पानी देने से इंकार कर दिया और उनसे कठोर शब्दों में बात की। जब भई मरदाना जी निराश होकर गुरु नानक देव जी के पास लौटे, तब गुरु जी ने उन्हें परमात्मा का नाम जपने के लिए कहा।
इसके बाद गुरु नानक देव जी ने पास पड़ा एक बड़ा पत्थर हटाया, तो उसी स्थान से स्वच्छ पानी का एक चश्मा फूट पड़ा। भई मरदाना जी ने उस पानी से अपनी प्यास बुझाई। इस घटना के साथ ही शाह वली कंधारी का चश्मा सूख गया।
यह देखकर क्रोधित होकर उसने पहाड़ से एक बड़ा पत्थर गुरु नानक देव जी की ओर फेंक दिया। गुरु जी ने उस पत्थर को अपने हाथ से रोक लिया। माना जाता है कि उसी समय उस पत्थर पर गुरु नानक देव जी के दाहिने हाथ की छाप बन गई।
आज भी उस पत्थर के पीछे से स्वच्छ और ठंडा पानी निकलकर एक बड़े सरोवर में बहता है। इस चमत्कार को देखकर शाह वली कंधारी ने गुरु नानक देव जी की महानता को स्वीकार कर लिया और वह गुरु जी का भक्त बन गया।
गुरुद्वारा पंजा साहिब तक पहुँचने के लिए आप अपने स्थान और सुविधा के अनुसार विभिन्न परिवहन साधनों का उपयोग कर सकते हैं। नीचे कुछ सामान्य विकल्प दिए गए हैं:
कार द्वारा: गुरुद्वारा पंजा साहिब पाकिस्तान के हसन अब्दाल शहर में स्थित है। यह रावलपिंडी से लगभग 40 किमी और इस्लामाबाद से करीब 75 किमी दूर है। आप “Gurdwara Panja Sahib, Hasan Abdal” को GPS में दर्ज करके सीधे कार से गुरुद्वारे तक पहुँच सकते हैं। सड़क मार्ग अच्छी तरह विकसित है और यात्रा सुविधाजनक है।
रेल द्वारा: निकटतम रेलवे स्टेशन हसन अब्दाल रेलवे स्टेशन है। वहाँ से आप स्थानीय टैक्सी या रिक्शा लेकर गुरुद्वारे तक पहुँच सकते हैं। गुरुद्वारा रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किमी की दूरी पर स्थित है।
बस द्वारा: रावलपिंडी और इस्लामाबाद से हसन अब्दाल के लिए कई स्थानीय बसें और निजी परिवहन सेवाएँ उपलब्ध हैं। हसन अब्दाल पहुँचने के बाद आप छोटी टैक्सी यात्रा करके आसानी से गुरुद्वारे तक पहुँच सकते हैं।
हवाई मार्ग से: निकटतम हवाई अड्डा इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो गुरुद्वारे से लगभग 75 किमी दूर है। हवाई अड्डे से आप टैक्सी या राइड-शेयरिंग सेवा लेकर हसन अब्दाल पहुँच सकते हैं।
यात्रा पर निकलने से पहले अपने स्थान के अनुसार वर्तमान परिवहन समय-सारिणी और उपलब्धता की जाँच करना उचित है। भारतीय नागरिकों को पाकिस्तान जाने के लिए वीज़ा प्राप्त करना आवश्यक होता है, जिसमें तीर्थ यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट रूप से उल्लेखित होना चाहिए। पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों की यात्रा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा अनुमति की भी आवश्यकता हो सकती है, इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करना जरूरी है।
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