गुरुद्वारा चरण पादुका पातशाही पहली और नौवीं, निजामाबाद के पास, आजमगढ़ जिला के एक छोटे से कस्बे में स्थित है। यह स्थान सराय रानी से लगभग 8 किलोमीटर लंबी लिंक सड़क द्वारा तथा फरीहा से लगभग 6 किलोमीटर लंबी सड़क द्वारा जुड़ा हुआ है। सराय रानी और फरीहा दोनों ही नॉर्थ-ईस्टर्न रेलवे की बलिया–शाहगंज मीटर गेज रेल लाइन पर स्थित रेलवे स्टेशन हैं।
यह गुरुद्वारा उस पवित्र स्थान की याद में स्थापित है जहाँ गुरु नानक देव जी ने अपनी पूर्वी उदासी के दौरान 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में आगमन किया था तथा गुरु तेग बहादुर जी वर्ष 1670 में पंजाब लौटते समय यहाँ से होकर गुज़रे थे।
इस स्थल का प्रारंभिक नाम चरण पादुका (लकड़ी की खड़ाऊँ) था और इसकी सेवा-देखभाल उदासी संतों द्वारा की जाती थी। बाद में बावा कृपा दयाल सिंह, गोइंदवाल से यहाँ आए और उन्होंने इस स्थान पर एक व्यवस्थित गुरुद्वारा स्थापित किया। उन्होंने निजामाबाद में रहकर सिख धर्म का प्रचार किया, जिससे यह स्थान एक प्रसिद्ध सिख प्रचार केंद्र बन गया। उनके पुत्र साधो सिंह और पौत्र, प्रसिद्ध विद्वान एवं कवि बावा सुमेर सिंह ने भी इस स्थान की परंपरा और महत्ता को आगे बढ़ाया।
वर्तमान समय में गुरुद्वारे में लकड़ी की एक जोड़ी पादुका सुरक्षित रखी गई है, जिनमें से एक को गुरु तेग बहादुर जी से संबंधित माना जाता है। इसके अतिरिक्त यहाँ गुरु ग्रंथ साहिब जी की चौदह प्राचीन हस्तलिखित बीड़ें भी संरक्षित हैं। गुरुद्वारे का समय-समय पर नवीनीकरण किया गया है और इसका प्रबंधन संत साधु सिंह मौनी के उत्तराधिकारियों द्वारा किया जा रहा है।


